"अफ्रीका से लेकर मध्य एशिया तक: मोदी का पांच देशों का रणनीतिक दौरा शुरू"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 जुलाई 2025 से अपने पांच देशों के दौरे की शुरुआत की है, जो भारतीय विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री घाना, सेनेगल, कतर, ऑस्ट्रिया और रूस का दौरा करेंगे। यह दौरा भारत के वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दौरे की प्रमुख विशेषताएं:
1. घाना की ऐतिहासिक यात्रा:
यह पहली बार है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री घाना का दौरा कर रहे हैं। इससे पहले केवल पंडित नेहरू और पी.वी. नरसिम्हा राव ने अफ्रीकी देशों का दौरा किया था।
इस यात्रा का उद्देश्य भारत-अफ्रीका सहयोग को बढ़ाना, व्यापारिक अवसरों को खंगालना और भारतीय डायस्पोरा को जोड़ना है।
2. सेनेगल के साथ संबंधों में नई ऊर्जा:
सेनेगल के साथ भारत की रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को लेकर बातचीत की उम्मीद है।
भारत अफ्रीकी महाद्वीप में एक भरोसेमंद भागीदार बनना चाहता है, और यह यात्रा उस दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
3. कतर: ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीय:
खाड़ी देशों में कतर भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
इस चरण में ऊर्जा सुरक्षा, एलएनजी आपूर्ति, और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा एवं हितों पर चर्चा प्रमुख मुद्दे होंगे।
4. ऑस्ट्रिया में पहली बार प्रधानमंत्री की यात्रा:
यह भारत-ऑस्ट्रिया के बीच उच्च स्तरीय संवाद का पहला बड़ा मौका है।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप्स, और ग्रीन एनर्जी क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी।
5. रूस – पुरानी दोस्ती को नई दिशा:
यूक्रेन युद्ध के बाद यह यात्रा खास मायने रखती है।
रूस के साथ रक्षा, तेल आयात, और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
मोदी और पुतिन की मुलाकात से यह संकेत जाएगा कि भारत अपनी "स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी" नीति पर कायम है।
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