"जेल की सलाखों के पीछे जातीय ज़ुल्म: FIR न होने पर भड़का समाज

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"जेल की सलाखों के पीछे जातीय ज़ुल्म: FIR न होने पर भड़का समाज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। कुंभी समाज के युवक श्याम देशमुख के साथ जेल में जिस क्रूरता से मारपीट की गई, उसने जेल सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निष्क्रियता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर हमले को 25 दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस ने FIR तक दर्ज नहीं की।

घटना की शुरुआत 4 जून को हुई, जब श्याम देशमुख को एक सामाजिक विवाद में न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। वहां, पहले से बंद बंदियों और जेल कर्मियों की मिलीभगत से उनके साथ बर्बर मारपीट की गई। मारपीट इतनी भीषण थी कि श्याम का एक पैर टूट गया और पूरे शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं, मारपीट से पहले उन्हें धमकाया गया और उनकी पत्नी और बच्चों की तस्वीरें दिखाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया — जो किसी यातना से कम नहीं।

इस मामले में न्याय की मांग को लेकर कुंभी समाज में आक्रोश फैल गया है। FIR दर्ज न होने से नाराज़ समाज के लोगों ने जेल के सामने काली पट्टी बाँधकर मौन प्रदर्शन किया। उनका साफ कहना है कि अगर जल्द FIR दर्ज नहीं की गई और दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान और न्याय की लड़ाई बन चुका है।

यह मामला जेल में जातीय भेदभाव और मानवाधिकारों के हनन की गंभीर तस्वीर सामने लाता है। सवाल यह उठता है कि क्या जेल प्रशासन दोषियों को बचा रहा है? या फिर यह सिस्टम की उस खामोशी का हिस्सा है, जो कमजोर वर्ग की चीखों को सुनने से इंकार करता है?

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