भारत पर ड्रोन गिराए, अब मेट्रो चलाएंगे? तुर्की कंपनी को ठेका मिलने पर उठे सवाल
नई दिल्ली। एक तरफ देश की सीमाओं पर दुश्मन ड्रोन भेजकर भारत की सुरक्षा को चुनौती देते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी ड्रोन बनाने वाली तुर्की कंपनी को भोपाल-इंदौर मेट्रो का ठेका दे दिया गया!
यह ठेका मेट्रो के डिजिटल टिकटिंग सिस्टम का है, जो यात्रियों की हर मूवमेंट, डेटा और पेमेंट की जानकारी सिस्टम में दर्ज करता है। अब सवाल ये है कि क्या हम अपनी संवेदनशील जानकारियों को ऐसे हाथों में सौंप रहे हैं, जिनका रिश्ता भारत विरोधी गतिविधियों से रहा है?
कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के मुताबिक, जिस कंपनी को यह काम सौंपा गया है, वही कंपनी पाकिस्तान को ड्रोन तकनीक सप्लाई करती है। और इन ड्रोनों का इस्तेमाल पंजाब, जम्मू और कश्मीर में आतंकियों को हथियार पहुंचाने में किया गया।
मंत्री का बयान गरम:
नगरीय प्रशासन मंत्री विश्वास सारंग ने कहा—
"यदि यह सच है कि इस कंपनी का संबंध भारत पर हुए हमलों से है, तो ठेका रद्द होगा, चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े।"
अब जनता के मन में ये सवाल हैं:
क्या विदेशी कंपनियों को देश के अंदरूनी सिस्टम में एंट्री देना ठीक है?
क्या ‘मेक इन इंडिया’ सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गया है?
क्या सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को लेकर सरकार सतर्क है?
क्या होता है इस सिस्टम में?
मेट्रो का टिकटिंग सिस्टम सिर्फ टोकन देने का काम नहीं करता, बल्कि हर यात्री की आवाजाही, लोकेशन, समय और ट्रांजैक्शन का डेटा रिकॉर्ड करता है। यानी, यह सिस्टम हैक हुआ तो यात्रियों की निजी जानकारी और सिस्टम की सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
अब सरकार के सामने दो विकल्प:
1. ठेका रद्द करके देशहित को प्राथमिकता दी जाए।
2. या फिर लोगों के सवालों और गुस्से का सामना किया जाए।
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