नाजुक भसीन की मौत और BHU में छात्र आक्रोश: लापरवाही के खिलाफ उठी आवाज़

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नाजुक भसीन की मौत और BHU में छात्र आक्रोश: लापरवाही के खिलाफ उठी आवाज़

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) देश का एक प्रमुख शिक्षण संस्थान है, जहां छात्रों की अकादमिक और सामाजिक सुरक्षा सर्वोपरि मानी जाती है। लेकिन जुलाई 2025 में पर्यावरण विज्ञान की शोध छात्रा नाजुक भसीन की रहस्यमयी मौत ने पूरे परिसर को झकझोर कर रख दिया। यह घटना न केवल एक छात्रा की असमय मृत्यु तक सीमित रही, बल्कि इससे जुड़े सवालों ने BHU के अस्पताल, प्रशासनिक लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविकता को कठघरे में खड़ा कर दिया।

2. घटना का विवरण

नाजुक भसीन BHU की सीनियर रिसर्च फेलो थीं और न्यू पीएचडी गर्ल्स हॉस्टल में रहती थीं। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल (एसएस हॉस्पिटल) के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उन्हें केवल ORS और पैरासिटामोल दी गई। गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए कोई वरिष्ठ डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया।

3. छात्रों का आक्रोश और विरोध प्रदर्शन

नाजुक की मौत के बाद BHU में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।

छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल के भोजन की गुणवत्ता खराब है और यही उनकी बिगड़ती सेहत का कारण बना।

इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की घोर लापरवाही सामने आई।

स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं और कई बार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।

छात्र संगठन NSUI और भगत सिंह छात्र मोर्चा ने आंदोलन का नेतृत्व किया। छात्राओं ने हॉस्टल से सिंह द्वार तक मोमबत्ती मार्च निकाला और एसएस हॉस्पिटल के मेडिकल अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। नाजुक को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ प्रशासन की जवाबदेही की मांग भी की गई।

तीन दिन इलाज के बावजूद उनकी स्थिति नहीं सुधरी और गुरुवार रात उनका निधन हो गया। फॉरेंसिक विभाग की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसके बाद उनके अंगों के नमूने बिसरा, लखनऊ भेजे गए हैं, जहां से एक सप्ताह में रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

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