“भारतमाला मुआवजा घोटाले में 6 राजस्व अधिकारियों को कोर्ट का अंतिम अल्टीमेटम—29 जुलाई तक न होंगे पेश तो कुर्की होगी”
भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत छत्तीसगढ़ के रायपुर–विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर पिछले कुछ महीनों से मुआवजा घोटाले की गंभीर कथाएं उजागर हो रही हैं। अब इसी घोटाले में छह राजस्व विभाग के अधिकारी कोर्ट के दायरे में आ गए हैं।
इन अधिकारियों में शामिल हैं:
निर्भय कुमार साहू (पूर्व SDM/वर्तमान डिप्टी कलेक्टर)
शशिकांत कुर्रे (तहसीलदार)
लखेश्वर प्रसाद किरण (नायब तहसीलदार)
जितेन्द्र कुमार साहू, बसंती घृतलहरे, लेखराम देवांगन (सभी पटवारी)
कोर्ट का सख्त आदेश
विशेष कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), धारा 84 के तहत इन सभी अधिकारियों के खिलाफ ‘उद्घोषणा’ जारी की है। प्रत्येक आरोपी को 29 जुलाई 2025 तक न्यायालय में पेश होने का अंतिम मौका दिया गया है। यदि वे समय रहते उपस्थित नहीं होते हैं, तो अदालत उनकी संपत्ति कुर्क करने, गैरजमानती वारंट जारी करने आदि सख्त कार्रवाई की अनुमति दे चुकी है ।
मुआवजे की रकम और तरीके
जांच में सामने आया है कि वास्तविक मुआवजे की राशि रु 29.5 करोड़ थी, लेकिन इसे बढ़ाकर करीब रु 78 करोड़ दिखाया गया।
अधिकारियों और दलालों ने जमीन को छोटे छोटे हिस्सों में बांटकर नकली नामों का इस्तेमाल किया—80 नए नाम जोड़कर, 159 खसरा नंबरों में विभाजन करके, रिकॉर्ड में आधे दर्जन मिट्टी में धुल देने वाले संशोधन किए गए ।
प्रभावित किसान और हितग्राही
भूमि के असली मालिकों को केवल रु 30 लाख तक का मुआवजा मिला, जबकि GHERA पुष्ट हों, दलालों और अधिकारियों ने रु 48 करोड़ हड़प लिए ।
अन्य एक रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि रु 164 करोड़ से अधिक रुपए काम में लिए गए और करीब 170 किसानों के खाते से ट्रांजैक्शन हुआ, बाद में खाते बंद कर दिए गए ।
कार्रवाई—कुर्की और NBW की तैयारी
कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि 29 जुलाई तक अवहेलना होने पर NON‑BAILABLE WARRANT (NBW) जारी किया जाएगा और उनके खिलाफ संपत्ति कुर्की की कार्यवाही शुरू होगी ।
जांच एजेंसियों को आरोपी ‘फरार’ घोषित करने और राष्ट्रीय स्तर पर नोटिस जारी करने के अधिकार मिलेंगे।
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