Young leaders and workers unhappy with Congress कांग्रेस से नाराज़ युवा नेता और कार्यकर्ता, भाजपा में तलाश रहे विकल्प: अरशद खान मुतवल्ली
कांग्रेस से नाराज़ युवा नेता और कार्यकर्ता, भाजपा में तलाश रहे विकल्प: अरशद खान मुतवल्ली
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में युवा कांग्रेस की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है। कांग्रेस के भीतर युवाओं की उपेक्षा और अनदेखी को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। भाजपा नेता और पारस नगर के मुतवल्ली अरशद खान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि कांग्रेस के युवा नेता और कार्यकर्ता अपने ही वरिष्ठ नेताओं से बेहद नाराज हैं। इस नाराजगी का असर कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठकों और धरना–प्रदर्शन कार्यक्रमों में साफ तौर पर देखा जा सकता है।
100 से ज्यादा नेताओं को नोटिस
कांग्रेस की आंतरिक कलह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा ने हाल ही में अपने ही 100 से ज्यादा जिला अध्यक्षों, प्रभारियों और युवा नेताओं–कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी के भीतर यह कदम संगठन की कमजोर पकड़ और युवाओं के असंतोष की पुष्टि करता है।
2018 में कांग्रेस की जीत में युवाओं की अहम भूमिका
अरशद खान ने याद दिलाया कि 2018 में कांग्रेस की सरकार बनाने में युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। साल 2003 से 2018 तक लगातार 15 वर्षों तक भाजपा की सत्ता के खिलाफ सड़कों से लेकर सदन तक युवा कांग्रेस ने संघर्ष किया।
इन युवाओं ने अपने वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और सांसदों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विरोध प्रदर्शन किए, लाठियां खाईं और जेल भी गए। खून–पसीना बहाकर सत्ता परिवर्तन का रास्ता तैयार किया। लेकिन 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद, उन्हीं संघर्षशील युवाओं को लगातार नजरअंदाज किया गया।
सत्ता में उपेक्षा का आरोप
युवा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सत्ता आने के बाद विधायकों, मंत्रियों और सांसदों ने उनकी कोई सुध नहीं ली। न उनकी समस्याओं को सुना गया और न ही उन्हें संगठन या सत्ता में कोई सम्मानजनक स्थान मिला। लगातार उपेक्षा से परेशान ये कार्यकर्ता अब अपने वरिष्ठ नेताओं से दूरी बना रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में युवाओं की मौजूदगी लगातार घट रही है।
भाजपा का खुला दरवाज़ा
भाजपा नेता अरशद खान मुतवल्ली ने कहा कि कांग्रेस के संघर्षशील युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे युवाओं के लिए भारतीय जनता पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं। भाजपा में उन्हें सम्मान और अवसर मिलेगा।
नाराजगी का सियासी असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा कांग्रेस का गुस्सा और संगठन से दूरी कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों में बड़ा संकट साबित हो सकती है। पार्टी का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत हमेशा से युवा कार्यकर्ता रहे हैं। अगर वही निराश और उपेक्षित महसूस करेंगे तो कांग्रेस की चुनावी ताकत कमजोर हो सकती है।
दूसरी ओर, भाजपा लगातार ऐसे नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश में लगी है। अगर बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होते हैं तो यह कांग्रेस के लिए गंभीर झटका होगा।
भविष्य की राह
छत्तीसगढ़ की राजनीति में युवा हमेशा निर्णायक भूमिका में रहे हैं। 2018 की जीत इसका उदाहरण है। लेकिन वर्तमान में कांग्रेस के भीतर जो असंतोष और खीझ पनप रही है, उसका असर सीधे–सीधे संगठनात्मक मजबूती पर पड़ रहा है।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इन नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में कितना सफल होता है या फिर भाजपा इस असंतोष को अपने पक्ष में कितना भुना पाती है।
मायने
कांग्रेस की पांच साल की सरकार के बाद आज वही युवा, जिन्होंने पार्टी को सत्ता तक पहुँचाया, उपेक्षा से आहत और नाराज दिखाई दे रहे हैं। अरशद खान मुतवल्ली के बयान ने इस असंतोष को और स्पष्ट कर दिया है। अब यह तय करेगा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति किस करवट बैठेगी—क्या कांग्रेस युवा कार्यकर्ताओं को फिर से साध पाएगी या भाजपा इस नाराजगी को अपने लिए सुनहरा अवसर बनाएगी।
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