Vishnu Dev government Circuit House-turned-Lakshmi House विष्णु देव सरकार में कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और सर्किट हाउस बना “लक्ष्मी हाउस” विवाद
विष्णु देव सरकार के दो साल: कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और सर्किट हाउस बना “लक्ष्मी हाउस” विवाद
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार को दो साल पूरे हो गए हैं। सत्ता के इस सफर में जहां सरकार अपनी उपलब्धियों को गिनाने में जुटी है, वहीं विपक्ष लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ढीले रवैये से चल रही है और सत्ता का असली संचालन मुख्यमंत्री के आसपास बैठे खास अधिकारी, ओएसडी और पीए कर रहे हैं। इसी बीच रायपुर के सर्किट हाउस को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं में सरकार और मंत्रियों को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के दौरान मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को अब महत्व नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि खुद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी आरोप लगाए हैं कि मंत्री और विधायक अब कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं कर रहे।
हाल ही में ओपी चौधरी खेमे से एक राजनीतिक पत्र वायरल हुआ, जिसमें साफ तौर पर लिखा गया कि मंत्री अपने खास लोगों से घिरे हुए हैं और कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर रहे हैं। यह केवल एक मंत्री का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश के तमाम मंत्रियों की यही स्थिति बताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा जैसी संगठन-आधारित पार्टी में कार्यकर्ताओं की अनदेखी पार्टी के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकती है। क्योंकि भाजपा की नींव ही कार्यकर्ताओं के समर्पण और जमीनी पकड़ पर टिकी हुई है। अगर यही कार्यकर्ता नाराज हुए तो आने वाले चुनावों में इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।
सर्किट हाउस विवाद: “लक्ष्मी हाउस” में तब्दील
सरकार की छवि पर सबसे बड़ा धब्बा रायपुर के सर्किट हाउस को लेकर सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री के ओएसडी और खास अधिकारी सर्किट हाउस में कई-कई कमरे अपने नाम से बुक कराकर रखते हैं। हालत यह है कि जब कोई अन्य वीआईपी या पत्रकार अपने सीनियरों के लिए कमरे की मांग करते हैं तो उन्हें जगह नहीं मिलती।
प्रोटोकॉल अधिकारी भी इस पर असहाय दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि जब सीएम हाउस के अधिकारी कई कमरे एक साथ बुक कर लेते हैं, तो वे कुछ नहीं कर सकते। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि सर्किट हाउस अब “सरकारी अतिथि गृह” कम और “निजी ठिकाना” ज्यादा दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार, रात 11 बजे के बाद यहां बड़े व्यापारी और ठेकेदारों की आवाजाही शुरू होती है। इन्हीं कमरों में बैठकर कमीशन और ठेकेबाजी की डीलिंग होती है। किसी भी विभाग का बड़ा काम कराने के लिए लोग सीधे सर्किट हाउस पहुंचते हैं और वहीं से सौदेबाजी होती है। यही वजह है कि सर्किट हाउस को अब लोग व्यंग्य में “लक्ष्मी हाउस” कहने लगे हैं।
पत्रकारों की नाराजगी भी खुलकर सामने
सिर्फ कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि पत्रकार भी इस व्यवस्था से नाराज हैं। कई बार राजधानी रायपुर में बाहर से आए सीनियर पत्रकारों को ठहराने में स्थानीय पत्रकारों को परेशानी हुई है। कारण वही—सर्किट हाउस के कमरे पहले से ही सीएम हाउस के ओएसडी और अधिकारियों के नाम से बुक रहते हैं। इस वजह से मीडिया जगत में भी असंतोष बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री की छवि और अधिकारियों का दबदबा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौम्य और सरल स्वभाव का नेता माना जाता है। उनकी साफ-सुथरी कार्यशैली की छवि भी जनता के बीच मजबूत है। लेकिन आरोप यह हैं कि उनके आसपास बैठे अधिकारी और ओएसडी मुख्यमंत्री की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सरकार की असली कमान मुख्यमंत्री के हाथ में नहीं, बल्कि उनके खास अधिकारियों के हाथ में है। यही वजह है कि जनता और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंच पातीं।
विपक्ष का आक्रामक रुख
विपक्ष लगातार इस मुद्दे को हवा दे रहा है। कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं का कहना है कि सरकार जनता से कट चुकी है और सत्ता के गलियारों में केवल “डीलिंग पॉलिटिक्स” चल रही है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि सर्किट हाउस से ही पूरे प्रदेश की सरकार चलाई जा रही है।
भाजपा के लिए खतरे की घंटी
भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब खुले तौर पर सामने आने लगी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यही हालात रहे तो 2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हो सकता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता में बने मंत्री और विधायक यह भूल रहे हैं कि सत्ता का ताज उन्हीं कार्यकर्ताओं की मेहनत से हासिल हुआ है।
यदि कार्यकर्ताओं को सम्मान और महत्व नहीं मिला तो आने वाले चुनावों में यही कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर नेताओं को सबक सिखा सकते हैं। इतिहास गवाह है कि भाजपा में कार्यकर्ताओं की नाराजगी अक्सर बड़े राजनीतिक उलटफेर का कारण बनी है।
नतीजा
छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार के दो साल पूरे होने पर सरकार की उपलब्धियों से ज्यादा विवादों की चर्चा हो रही है। सर्किट हाउस का “लक्ष्मी हाउस” बन जाना और कार्यकर्ताओं की नाराजगी भाजपा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ईमानदार छवि के बावजूद उनके आसपास बैठे अधिकारी और ओएसडी ही सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अगर पार्टी और सरकार समय रहते इस नाराजगी को दूर करने और सर्किट हाउस जैसे विवादों पर रोक लगाने में सफल नहीं होती, तो आने वाले दिनों में यह भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।
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