शक्कर घोटाले पर सवाल: खाद्य विभाग की परस्पर विरोधी जानकारी ने बढ़ाई हलचल
शक्कर घोटाले पर सवाल: खाद्य विभाग की परस्पर विरोधी जानकारी ने बढ़ाई हलचल
रायपुर। प्रदेश में शक्कर वितरण को लेकर बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। खाद्य विभाग और संचालनालय द्वारा दी गई परस्पर विरोधी जानकारियों ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। एक ओर खाद्य विभाग के प्रभारी डायरेक्टर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा कर रहे हैं कि वर्ष 2021 से 2023 के दौरान शक्कर गायब होने का कोई प्रकरण या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर, विधानसभा में प्रस्तुत दस्तावेज इससे बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करते हैं।
विभाग की प्रेस विज्ञप्ति
प्रभारी खाद्य डायरेक्टर ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सितंबर 2022 में हुए सत्यापन में 15,280 क्विंटल शक्कर की कमी पाई गई थी। इनमें से 87 प्रतिशत यानी 13,740 क्विंटल की वसूली दुकान संचालकों से कर ली गई है। साथ ही 22 दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, 166 दुकानों को निलंबित और 153 दुकानों को बर्खास्त करने की जानकारी भी दी गई है।
विधानसभा में दी गई जानकारी अलग
लेकिन विधानसभा 2024 के बजट सत्र में पूछे गए तारांकित प्रश्न क्रमांक 58 के उत्तर में विभाग ने जो तथ्य रखे, वे इन दावों से मेल नहीं खाते।
परिशिष्ट-‘अ’ के अनुसार 24 मार्च 2023 की स्थिति में प्रदेशभर की उचित मूल्य दुकानों में शक्कर की भारी कमी दर्ज की गई।
प्रदेश के 33 जिलों में बस्तर की 344, कांकेर की 275, कोंडागांव की 233, कोरबा की 307, सक्ती की 276, बेमेतरा की 167, कवर्धा की 351, खैरागढ़ की 205, बलौदा बाजार की 227 और गरियाबंद की 188 दुकानों में गड़बड़ी सामने आई।
विभाग की रिपोर्ट में 2808.04 टन शक्कर की कमी स्पष्ट रूप से दर्ज है।
शक्कर का बाजार मूल्य 4000 रुपये प्रति क्विंटल मानें तो यह घाटा लगभग 114.60 करोड़ रुपये का होता है।
नोटिस, निलंबन और एफआईआर का आंकड़ा
विधानसभा प्रश्न क्रमांक 58 के परिशिष्ट-‘ब’ के अनुसार,
केवल शक्कर की अनियमितता पर 2847 राशन दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई।
231 दुकानें निलंबित, 160 दुकानें बर्खास्त की गईं।
1167 दुकानों को राजस्व वसूली की नोटिस तहसीलदारों द्वारा दी गई।
आश्चर्यजनक रूप से इतनी बड़ी गड़बड़ी के बावजूद केवल 10 दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल
खाद्य विभाग के दावे और विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक दस्तावेजों में स्पष्ट विरोधाभास है। यदि 2021 से 2023 के बीच शक्कर गायब होने का कोई मामला ही नहीं था, तो फिर हजारों दुकानों को कारण बताओ नोटिस और सैकड़ों दुकानों को निलंबित व बर्खास्त क्यों किया गया?
इसी मुद्दे को उठाते हुए हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने कहा कि यह साफ संकेत है कि खाद्य संचालनालय के अधिकारी घोटाले को छुपाने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने विधानसभा प्रश्न 58 के साथ संलग्न परिशिष्ट-‘अ’ और ‘ब’ की प्रतियां भी साझा की हैं।
कार्रवाई की मांग
राकेश चौबे ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक, जांच समिति के सभापति पुन्नू लाल मोहिले, खाद्य मंत्री और खाद्य सचिव को दस्तावेज भेजकर मांग की है कि प्रभारी डायरेक्टर फूड के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता के हिस्से की शक्कर गायब करना केवल भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि गरीबों के अधिकारों पर सीधा डाका है।
मायने
पूरे मामले से स्पष्ट है कि विभाग या तो विधानसभा में गलत जानकारी दे रहा है या अब मीडिया के सामने झूठ परोस रहा है। दोनों ही परिस्थितियाँ गंभीर हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बनाती हैं। शक्कर की कमी और करोड़ों रुपये के इस घोटाले को लेकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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