बिलासपुर में धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला: प्रार्थना सभा के नाम पर चल रहा था कथित धार्मिक बदलाव का प्रयास

Sensational case of conversion in Bilaspur: Alleged religious conversion was being attempted in the name of prayer meeting बिलासपुर में धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला: प्रार्थना सभा के नाम पर चल रहा था कथित धार्मिक बदलाव का प्रयास
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बिलासपुर में धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला: प्रार्थना सभा के नाम पर चल रहा था कथित धार्मिक बदलाव का प्रयास

बिलासपुर में धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला: प्रार्थना सभा के नाम पर चल रहा था कथित धार्मिक बदलाव का प्रयास

बिलासपुर, 20 जुलाई 2025 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक बार फिर धर्मांतरण को लेकर तनाव का माहौल बन गया है। सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित गीतांजलि सिटी फेस-2 में आत्मानंद स्कूल की एक शिक्षिका के आवास पर रविवार को "प्रार्थना सभा" के नाम पर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधि संचालित की जा रही थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस सभा में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग मौजूद थे। इसी दौरान किसी ने गोपनीय सूचना हिंदू संगठनों और पुलिस प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही पुलिस और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, जहां ईसाई धर्म से जुड़ी गतिविधियों के साथ यीशु मसीह की आराधना, बाइबल वितरण और अन्य धार्मिक सामग्री पाई गई।

गोपनीय तरीके से आयोजित की गई थी सभा

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि यह सभा पूरी तरह से गोपनीय रखी गई थी, ताकि बाहरी लोगों को भनक न लगे। मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि इसमें शामिल कुछ व्यक्तियों पर मानसिक और आध्यात्मिक दबाव बनाकर धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा था।

थाने में हुआ आमना-सामना

घटना के बाद दोनों पक्ष – शिक्षिका व उसके समर्थक, और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि – सरकंडा थाने पहुंचे। पुलिस ने शिक्षिका से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में जबरन धर्मांतरण, आर्थिक प्रलोभन या मानसिक दबाव की पुष्टि होती है, तो छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की सतर्कता पर सवाल

यह घटना प्रदेश में एक बार फिर धर्मांतरण नेटवर्क और प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े कर रही है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है — बिलासपुर समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में इस प्रकार की गतिविधियाँ चल रही हैं, जिनमें प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण का प्रयास किया जाता है।

स्थानीय संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम को वैचारिक युद्ध करार देते हुए प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयोजनों की नियमित जांच और निगरानी होनी चाहिए। उनका कहना है कि "धार्मिक स्वतंत्रता" के नाम पर लोगों की मौलिक आस्था से खिलवाड़ करना किसी भी समाज के लिए खतरे की घंटी है।

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