हँसी, योग और हर्बल चाय के संग बुजुर्गों और किसानों का 'हेल्दी डे'
हँसी, योग और हर्बल चाय के संग बुजुर्गों और किसानों का 'हेल्दी डे'
रायपुर, 19 जून 2025। ना डॉक्टर की कतार, ना दवा की फिक्र — बस योगा मैट, हँसी-ठिठोली और हर्बल चाय की चुस्कियों के बीच बीता आज का दिन। छत्तीसगढ़ के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जारी योग एवं वेलनेस सप्ताह के तहत 19 जून का दिन बुजुर्गों, किसानों और ग्रामीण जनों को समर्पित रहा।
'हँसी और सेहत का दिन' नाम से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने योग को गंभीर मुद्राओं से निकालकर, मेल-मिलाप और मस्ती का उत्सव बना दिया। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल में योग, मनोरंजक खेल, आत्मीय संवाद और हर्बल चाय की गरमागरम चुस्कियों के साथ यादों की साझेदारी ने सभी का मन मोह लिया।
योग, खेल और अनुभवों की खुली बैठक
दिन की शुरुआत प्रातः वज्रासन, अनुलोम-विलोम और अन्य सरल योगाभ्यासों से हुई। इनमें किसी भी आयु वर्ग के लोग सहजता से शामिल हुए। इसके बाद रिंग टॉस और गेंद पास जैसे खेलों ने आयोजन स्थल को ठहाकों और तालियों से गूंजा दिया।
कार्यक्रम का सबसे आत्मीय और भावनात्मक क्षण तब आया, जब हर्बल चाय के साथ प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। बुजुर्गों ने पुराने दिनों की बातें सुनाईं और किसानों ने अपनी मिट्टी, खेती और बदलते समय की यादें साझा कीं।
शारीरिक ही नहीं, मानसिक और सामाजिक वेलनेस भी
इस आयोजन का मकसद केवल तन को स्वस्थ बनाना नहीं, बल्कि मानसिक संबल और भावनात्मक जुड़ाव को भी बढ़ावा देना है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद कारगर साबित हो रही है।
बुजुर्गों ने बताया कि लंबे समय बाद ऐसा अवसर मिला, जहाँ सबने साथ बैठकर हँसी-ठिठोली की, बीते दिनों को याद किया और अपने दिल की बातें साझा कीं।
स्वास्थ्य, स्मृतियाँ और साथ — तीनों का खूबसूरत संगम
योग एवं वेलनेस सप्ताह के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि असली वेलनेस केवल कसरत या इलाज नहीं, बल्कि वह एहसास है, जब चेहरे पर मुस्कान हो, मन हल्का हो और दिल पुराने अनुभवों से भर जाए।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में यह अभियान 20 जून तक जारी रहेगा, जिसमें हर दिन अलग-अलग वर्गों को ध्यान में रखकर गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।
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