राजिम विधायक रोहित साहू के गुर्गे कर रहे अवैध खनन,प्रशासन के दावों की खुली पोल, रातभर चल रहा अवैध खनन..
राजिम विधायक रोहित साहू के गुर्गे कर रहे अवैध खनन,प्रशासन के दावों की खुली पोल, रातभर चल रहा अवैध खनन..
गरियाबंद। जिले के राजिम क्षेत्र में रेत माफिया एक बार फिर प्रशासनिक दावों को ठेंगा दिखा रहे हैं। माइनिंग विभाग भले ही अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और बेरियर पर 24 घंटे निगरानी का दावा कर रहा हो, लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। पैरी नदी के कुरूस केरा घाट में हर रात भारी मात्रा में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन खुलेआम जारी है।
रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक निकलीं 50 से ज्यादा हाइवा
बीती रात हमारी टीम ने राजिम मुख्य चौराहे पर अपनी नजर बनाए रखी। रात 10:38 बजे से सुबह 4 बजे तक 50 से ज्यादा रेत से भरी हाइवा उस बेरियर से निकलीं, जहां विभागीय तैनाती का दावा किया गया था। चौंकाने वाली बात यह रही कि उस दौरान बेरियर पर माइनिंग का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था।
घटना से साफ है कि अवैध रेत परिवहन पूरी तरह माफियाओं के कब्जे में है और प्रशासनिक दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप, चेन माउंटेन रातभर घाट पर सक्रिय
कुरूस केरा घाट में तीन से अधिक चेन माउंटेन मशीनें रात 8 बजे से ही घाट पर पहुंच जाती हैं और सुबह होने से पहले उन्हें पास की नर्सरियों में झाड़ियों के बीच छिपा दिया जाता है। यह पूरा तंत्र बिना किसी डर के लगातार सक्रिय है, जिससे स्पष्ट होता है कि इन्हें कहीं न कहीं राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
पत्रकारों पर हमले के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन
पितई बंद घाट में अवैध खनन की कवरेज करने गए पत्रकारों पर हुए जानलेवा हमले के बाद जिला प्रशासन ने सभी रेत घाटों पर अवैध खनन और परिवहन पर पूर्ण रोक का दावा किया था। राजिम विधायक रोहित साहू ने भी प्रशासनिक कार्रवाई और टास्क फोर्स गठन की जानकारी दी थी। बावजूद इसके हालात जस के तस बने हुए हैं।
माइनिंग अधिकारी और विधायक के दावे
जिला माइनिंग अधिकारी का कहना है, “जिले में अवैध माइनिंग पूरी तरह से बंद है। राजिम चौक के आगे फॉरेस्ट बेरियर में हमारी टीम 24 घंटे तैनात रहती है। यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई करेंगे।”
राजिम विधायक रोहित साहू ने कहा, “जहां-जहां अवैध कार्यों की जानकारी मिली है, वहां संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। राजिम बेरियर पर माइनिंग विभाग की तैनाती है, अगर एक भी गाड़ी निकलेगी तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”
प्रशासन चाहे तो कर सकता है सच्चाई उजागर
अगर प्रशासन वास्तव में अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए गंभीर है, तो राजिम के मुख्य मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर सच सामने ला सकता है।
निष्कर्ष
राजिम में रेत माफियाओं का यह बेखौफ खेल न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर भी सवाल खड़े कर रहा है। क्या अब भी कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
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