जर्जर स्कूल की इमारत गिरने से 4 मासूमों की मौत, 11 गंभीर घायल – कब जागेगी व्यवस्था?

Rajasthan: 4 innocent children died and 11 were seriously injured as a dilapidated school building collapsed – when will the system wake up? राजस्थान: जर्जर स्कूल की इमारत गिरने से 4 मासूमों की मौत, 11 गंभीर घायल – कब जागेगी व्यवस्था?
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जर्जर स्कूल की इमारत गिरने से 4 मासूमों की मौत, 11 गंभीर घायल – कब जागेगी व्यवस्था?

राजस्थान: जर्जर स्कूल की इमारत गिरने से 4 मासूमों की मौत, 11 गंभीर घायल – कब जागेगी व्यवस्था?

झालावाड़ (राजस्थान), 25 जुलाई 2025 —राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में  एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। गांव के सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें दबकर चार बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 बच्चे गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के समय कक्षा में करीब 35 बच्चे मौजूद थे, जिनमें से 19 बच्चों को हल्की चोटें आई हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल की इमारत काफी समय से जर्जर हालत में थी, और कई बार प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई थी। लेकिन अफसोस, कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि जिन मासूम बच्चों का कसूर सिर्फ इतना था कि वे किसी नेता, मंत्री, विधायक या सांसद के बच्चे नहीं थे — उन्हें इस भयावह लापरवाही की कीमत अपनी जान से चुकानी पड़ी।

"न सुनवाई, न मरम्मत – सिर्फ अनदेखी"

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की दीवारों में दरारें थीं, छत टपक रही थी और खिड़कियां टूटी हुई थीं। कई बार ग्राम पंचायत और शिक्षा विभाग को शिकायतें दी गईं, लेकिन या तो फाइलें दबा दी गईं या बजट का रोना रोया गया।

हादसे के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सरकारें सिर्फ नफरत की राजनीति और धार्मिक ध्रुवीकरण में व्यस्त हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर जनता की बुनियादी ज़रूरतें — शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा — को पूरी तरह नजरअंदाज़ कर दिया गया है।

राजनीति का असली चेहरा

यह सवाल भी अब खड़ा हो रहा है कि जब नेताओं को सिर्फ धर्म और जाति के नाम पर वोट मिल जाते हैं, तो फिर वे क्यों बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था या सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए काम करें?

हर चुनाव में वादे किए जाते हैं कि "बदलाव लाएंगे", "बच्चों का भविष्य संवारेंगे" लेकिन असलियत यह है कि उन वादों की नींव भी इतनी ही जर्जर होती है जितनी इस स्कूल की बिल्डिंग थी।

आगे क्या?

अब प्रशासन की ओर से जांच के आदेश दे दिए गए हैं, और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन सवाल यही है —

"क्या इन बयानों से चार मासूमों की ज़िंदगी वापस आ जाएगी?"

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