police's big action: Fake IB officer रायपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी I.B. अधिकारी बनकर लोगों को गुमराह करने वाला युवक गिरफ्तार
रायपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी I.B. अधिकारी बनकर लोगों को गुमराह करने वाला युवक गिरफ्तार
रायपुर। राजधानी रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। आमानाका थाना पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जो खुद को खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (I.B) का अधिकारी बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था। आरोपी ने फर्जी आईडी कार्ड बनवाकर अपने पास रखा था और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल कर आम नागरिकों पर रौब झाड़ता था। पुलिस ने आरोपी की पहचान विशाल कुमार (29 वर्ष), पिता राजीव कुमार, निवासी भोपाल (मध्यप्रदेश) के रूप में की है।
वाहन चेकिंग के दौरान खुली पोल
रायपुर पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन पर राजधानी में नियमित रूप से वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 31 अगस्त की रात थाना आमानाका की टीम चंदनडीह चौक, नंदनवन जीई रोड के पास वाहनों की जांच कर रही थी।
उसी दौरान एक स्कूटी (MP04YJ1386) तेज रफ्तार और लापरवाही से आती दिखाई दी। पुलिस टीम ने स्कूटी चालक को रोककर नाम-पता पूछा। उसने खुद को विशाल कुमार बताया और तुरंत एक आईडी कार्ड दिखा दिया। इस कार्ड में वह खुद को "इंटेलिजेंस ब्यूरो का सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी" बताता था और कार्ड पर भारत सरकार गृह मंत्रालय का मोनोग्राम भी छपा हुआ था।
आईडी कार्ड निकला फर्जी
पुलिसकर्मियों को कार्ड देखकर संदेह हुआ। जब उसकी बारीकी से जांच की गई तो यह पूरी तरह फर्जी निकला। पूछताछ में पता चला कि आरोपी लंबे समय से इस नकली पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहा था। वह इसे दिखाकर आम नागरिकों पर धौंस जमाता और खुद को खुफिया एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें गुमराह करता था।
पुलिस ने मौके पर ही आरोपी को हिरासत में लेकर थाने लाया और सख्त पूछताछ शुरू की। जांच में यह भी सामने आया कि वह रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र स्थित टैगोर नगर में अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहा था।
अपराध पंजीबद्ध
थाना आमानाका पुलिस ने आरोपी विशाल कुमार के खिलाफ अपराध क्रमांक 286/25 दर्ज किया है। उस पर भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 319(2), 336(3), 340(2) के तहत धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और ठगी से संबंधित मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, तेज और लापरवाह वाहन चलाने पर उसके खिलाफ 184 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है।
आरोपी की पृष्ठभूमि
पुलिस जांच में सामने आया कि विशाल कुमार मूल रूप से भोपाल (मध्यप्रदेश) के श्रीनिवास रेजीडेंसी, मकान नंबर 13/310, नर्मदापुरम रोड, डी-मार्ट के पास का रहने वाला है। फिलहाल वह रायपुर में रहकर खुद को सरकारी खुफिया एजेंसी का अधिकारी बताता और आम लोगों पर रौब जमाता था।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर उसने यह फर्जी आईडी कार्ड कहां से और किसके सहयोग से बनवाया। आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह भी सक्रिय हो सकता है।
बड़ा अपराध टल गया
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर आरोपी समय रहते गिरफ्तार नहीं किया जाता तो वह इस फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल किसी बड़ी वारदात में कर सकता था। हाल के दिनों में राजधानी रायपुर में अपराधियों पर पुलिस ने लगातार सख्त कार्रवाई की है, और इस घटना से यह भी साफ हो गया है कि नकली पहचान पत्रों का उपयोग कर अपराध करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
पुलिस की अपील
पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि रायपुर में वाहन चेकिंग अभियान का उद्देश्य केवल यातायात व्यवस्था दुरुस्त करना नहीं है, बल्कि अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना भी है।
उन्होंने कहा,
> “आमानाका पुलिस की सतर्कता से एक फर्जी आईबी अधिकारी गिरफ्तार किया गया है, जो आम नागरिकों को ठगने की फिराक में था। अगर लोग ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों से रूबरू हों तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।”
पुलिस ने रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अजनबी द्वारा दिखाए गए आईडी कार्ड पर तुरंत भरोसा न करें। अगर कोई व्यक्ति खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताता है और उसके व्यवहार पर संदेह हो तो नजदीकी थाने को सूचना दें।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या वह पहले भी इस तरह की ठगी या प्रतिरूपण के मामलों में शामिल रहा है। साथ ही, उसके संपर्कों और नेटवर्क की भी गहन छानबीन की जा रही है।
नतीजा
यह घटना राजधानी पुलिस की सतर्कता और मुस्तैदी का बड़ा उदाहरण है। अगर समय रहते कार्रवाई न की जाती तो आरोपी नकली पहचान का इस्तेमाल कर न जाने कितने निर्दोष लोगों को ठग लेता।
रायपुर पुलिस की यह सफलता न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक सबक है कि “पहचान पत्र देखकर तुरंत भरोसा न करें, बल्कि सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें।”
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