छत्तीसगढ़ पुलिस में 3 नए Ex-Cadre DG पदों की कवायद पर सवाल, क्या दोहराई जा रही 2018 की कहानी?

Questions raised over the move to create 3 new ex-cadre DG posts in the Chhattisgarh Police; is the 2018 scenario repeating itself?
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छत्तीसगढ़ पुलिस में 3 नए Ex-Cadre DG पदों की कवायद पर सवाल, क्या दोहराई जा रही 2018 की कहानी?

छत्तीसगढ़ पुलिस में 3 नए Ex-Cadre DG पदों की कवायद पर सवाल, क्या दोहराई जा रही 2018 की कहानी?

MHA की पूर्व मंजूरी के बिना पद सृजन और पदोन्नति को लेकर उठे सवाल; 2018 में भी ऐसी नियुक्तियां बाद में करनी पड़ी थीं निरस्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस में DG स्तर के तीन नए Ex-Cadre पद सृजित कर तीन IPS अधिकारियों को पदोन्नति देने की प्रस्तावित कवायद ने प्रशासनिक और कानूनी हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन IPS अधिकारियों को DG/Special DG स्तर पर पदोन्नत करने के लिए Ex-Cadre पद सृजित किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

सबसे बड़ा सवाल इन पदों के सृजन के लिए केंद्र सरकार, विशेषकर गृह मंत्रालय (MHA) की पूर्व स्वीकृति को लेकर है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2018 में भी छत्तीसगढ़ में इसी तरह Ex-Cadre DG पदों के आधार पर की गई पदोन्नतियां बाद में निरस्त करनी पड़ी थीं।

2018 में क्या हुआ था?

उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, 4 दिसंबर 2017 को छत्तीसगढ़ सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से तीन Ex-Cadre DG स्तर के पद सृजित किए थे। उस समय यह व्यवस्था रखी गई थी कि केंद्र सरकार से स्वीकृति बाद में प्राप्त की जाएगी।

हालांकि, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से इन पदों को मंजूरी नहीं दी गई। इसके बावजूद 6 अक्टूबर 2018 को राज्य सरकार ने इन्हीं पदों के विरुद्ध तीन IPS अधिकारियों को पदोन्नति दे दी।

बाद में नियमगत स्थिति स्पष्ट होने के बाद राज्य सरकार ने 26 सितंबर 2019 को इन पदोन्नतियों को निरस्त कर दिया। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी वैध माना था।

क्यों महत्वपूर्ण है MHA की पूर्व स्वीकृति?

IPS कैडर की संरचना और उसकी स्वीकृत क्षमता केवल राज्य सरकार के निर्णय से निर्धारित नहीं होती। कैडर स्ट्रेंथ में बदलाव तथा निर्धारित सीमा से अधिक Ex-Cadre पदों पर कैडर अधिकारियों की नियुक्ति के मामलों में केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

नियमों के मुताबिक, राज्य सरकार केवल अपने कैबिनेट निर्णय के आधार पर ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकती, जिससे IPS कैडर की स्वीकृत संरचना या Ex-Cadre पदों की निर्धारित सीमा प्रभावित हो।

इसी तरह IPS Pay Rules के तहत भी उच्च वेतन स्तर वाले पदों की निर्धारित संख्या से अधिक नियुक्तियों तथा Selection Grade और उससे ऊपर के मामलों में केंद्र सरकार की पूर्व concurrence का महत्व है। नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर नियुक्ति को निरस्त किए जाने का प्रावधान भी है।

हालिया कैडर समीक्षा से भी जुड़ा सवाल

मामले में छत्तीसगढ़ IPS कैडर की हालिया समीक्षा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 21 मई 2025 को राज्य सरकार से परामर्श के बाद हुई कैडर समीक्षा में दो Ex-Cadre पदों की अनुमति का उल्लेख है।

ऐसे में यदि अब तीन अतिरिक्त DG स्तर के Ex-Cadre पद सृजित करने का प्रस्ताव सामने आता है, तो इन पदों की प्रशासनिक आवश्यकता, औचित्य और वैधानिक आधार को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या पुलिस संगठन हो जाएगा 'Top-Heavy'?

पुलिस संगठन में शीर्ष स्तर के पदों की संख्या बढ़ने से उसके प्रशासनिक ढांचे के जरूरत से ज्यादा ‘Top-Heavy’ होने की आशंका भी जताई जा रही है।

जानकारों का मानना है कि DG स्तर के नए पद सृजित करने से पहले तीन पहलुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है—

क्या इन पदों की वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता है?

क्या प्रस्तावित पद मौजूदा IPS कैडर समीक्षा के अनुरूप हैं?

क्या केंद्र सरकार/MHA की पूर्व स्वीकृति और आवश्यक concurrence प्राप्त है?

2018 की पुनरावृत्ति से बचने की चुनौती

वर्तमान प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वर्ष 2018 में Ex-Cadre पदों और उनसे जुड़ी पदोन्नतियों को लेकर विवाद की स्थिति बन चुकी है और बाद में पदोन्नतियां निरस्त करनी पड़ी थीं, तो क्या इस बार उसी तरह की स्थिति से बचने के लिए पहले ही सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी?

मामला सिर्फ तीन पदों या तीन अधिकारियों की पदोन्नति तक सीमित नहीं है। यह IPS कैडर प्रबंधन में राज्य और केंद्र के बीच निर्धारित वैधानिक व्यवस्था और नियमों के पालन से जुड़ा विषय है।

सरकार यदि किसी भी नए Ex-Cadre DG पद के सृजन पर आगे बढ़ती है, तो IPS Cadre Rules और Pay Rules के तहत केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति की स्थिति स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा। इससे भविष्य में संभावित कानूनी विवादों और प्रशासनिक जटिलताओं से बचा जा सकता है।

अब निगाह सरकार के अगले कदम पर

तीन नए Ex-Cadre DG पदों को लेकर चल रही कवायद के बीच अब निगाह इस बात पर है कि राज्य सरकार प्रस्ताव को किस कानूनी और प्रशासनिक आधार पर आगे बढ़ाती है।

सवाल तीन पदों का नहीं, बल्कि नियमों की सर्वोच्चता का है। वर्ष 2018 का अनुभव यही संकेत देता है कि ऐसी स्थिति में बाद में सुधार करने के बजाय निर्णय से पहले ही पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अधिक सुरक्षित और उचित होगा।

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