देवेंद्र यादव की चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 31 अगस्त से हाईकोर्ट में ट्रायल
देवेंद्र यादव की चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 31 अगस्त से हाईकोर्ट में ट्रायल
भिलाई। भिलाई विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका अब निर्णायक न्यायिक चरण में पहुंच गई है। 25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र यादव की ओर से दायर एक और चुनौती को खारिज कर दिया। इसके साथ ही चुनाव याचिका की सुनवाई को प्रारंभिक स्तर पर रोकने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में मेरिट और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम प्रकाश पांडेय ने जनवरी 2024 में देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में नामांकन पत्र में संपत्ति, आपराधिक प्रकरणों और न्यायालय से फरारी से संबंधित कथित गलत जानकारी देने के साथ-साथ भ्रष्ट आचरण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दूसरी चुनौती भी खारिज
चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खत्म कराने के लिए देवेंद्र यादव की ओर से हाईकोर्ट में आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में SLP No. 6306/2025 के जरिए चुनौती दी गई, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली।
इसके बाद हाईकोर्ट में वाद-प्रश्न निर्धारित किए जाने के बाद देवेंद्र यादव की ओर से आदेश 14 नियम 2 के तहत एक और आवेदन प्रस्तुत किया गया। हाईकोर्ट ने इस आवेदन को भी खारिज कर दिया।
इसी आदेश के खिलाफ देवेंद्र यादव एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। 25 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस चुनौती को भी प्रवेश के स्तर पर खारिज कर दिया।
इससे अब चुनाव याचिका को प्रारंभिक आपत्तियों के आधार पर रोकने की राह लगभग बंद हो गई है।
31 अगस्त से हाईकोर्ट में शुरू होगा ट्रायल
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब चुनाव याचिका का ट्रायल हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा। हाईकोर्ट पहले ही वाद-प्रश्न निर्धारित कर चुका है और 31 अगस्त से ट्रायल की कार्यवाही शुरू होने जा रही है।
अब मामला केवल तकनीकी आपत्तियों और प्रारंभिक अर्जियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आरोपों और साक्ष्यों की वास्तविक न्यायिक जांच होगी।
यानी अब यह तय होना है कि प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से लगाए गए आरोप और उनके समर्थन में पेश किए जाने वाले साक्ष्य न्यायालय की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं।
पांडेय पक्ष ने दी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी
प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में AOR अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने 25 अगस्त को हुई सुनवाई और न्यायालय के आदेश की जानकारी दी।
पांडेय पक्ष के अनुसार, देवेंद्र यादव की ओर से चुनाव याचिका की कार्यवाही को रोकने के लिए की गई यह चुनौती भी खारिज हो गई है। अब चुनाव याचिका का ट्रायल हाईकोर्ट में ही आगे बढ़ेगा।
करीब 1200 वोटों से मिली जीत पर अदालत में फैसला
2023 के विधानसभा चुनाव में देवेंद्र यादव ने भिलाई सीट पर करीब 1200 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इसी निर्वाचन को प्रेम प्रकाश पांडेय ने चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती दी है।
अब अदालत में होने वाला ट्रायल यह तय करेगा कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप और प्रस्तुत साक्ष्य कानूनी रूप से कितने प्रभावी हैं।
यदि ट्रायल के दौरान आरोप सिद्ध होते हैं और अदालत चुनाव याचिका को स्वीकार करती है, तो इसका सीधा असर देवेंद्र यादव के निर्वाचन और विधानसभा सदस्यता पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि चुनाव याचिका का परिणाम क्या होगा। अंतिम निर्णय ट्रायल और अदालत के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
अब जल्द आ सकता है चुनाव याचिका पर फैसला?
लगातार प्रारंभिक कानूनी चुनौतियों के कारण इस मामले की कार्यवाही में समय लगा है। अब हाईकोर्ट में 31 अगस्त से ट्रायल शुरू होने के बाद मामला अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करेगा।
यदि साक्ष्य और सुनवाई की कार्यवाही निर्धारित गति से आगे बढ़ती है, तो चुनाव याचिका पर पहले की तुलना में जल्द फैसला आने की संभावना बन सकती है। हालांकि, फैसले की निश्चित तारीख अभी तय नहीं है।
अब मामला ट्रायल और साक्ष्यों पर निर्भर
देवेंद्र यादव की ओर से अब तक चुनाव याचिका की प्रारंभिक सुनवाई रोकने या उसे शुरुआती स्तर पर समाप्त कराने के लिए अपनाए गए कई कानूनी रास्तों पर राहत नहीं मिली है।
हाईकोर्ट में आदेश 7 नियम 11 का आवेदन खारिज होना, सुप्रीम कोर्ट में SLP No. 6306/2025 में राहत नहीं मिलना, हाईकोर्ट में आदेश 14 नियम 2 का आवेदन खारिज होना और अब 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से दूसरी चुनौती का खारिज होना—इन घटनाक्रमों के बाद चुनाव याचिका अब ट्रायल के चरण में पहुंच गई है।
31 अगस्त से शुरू होने वाली कार्यवाही में अब फैसला राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि अदालत के सामने पेश होने वाले साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।
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