Paying tax is the biggest responsibility टैक्स चुकाना राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी : वरिष्ठ इनकम टैक्स वकील रोहित नरूला
टैक्स चुकाना राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी : वरिष्ठ इनकम टैक्स वकील रोहित नरूला
रायपुर। “टैक्स भरना सिर्फ एक कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक का सबसे बड़ा योगदान है।” यह कहना है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रख्यात इनकम टैक्स वकील रोहित नरूला का, जो बीते 35 वर्षों से लगातार टैक्स प्रैक्टिस कर रहे हैं।
रोहित नरूला का मानना है कि टैक्स भरने की परंपरा धीरे-धीरे भारतीय समाज में गहराई से जगह बना रही है। पहले जहाँ केवल सरकारी नौकरी करने वाले और उद्योगपति ही टैक्स चुकाने के लिए सामने आते थे, वहीं आज आम नागरिक भी जागरूक होकर खुद टैक्स रिटर्न भरने आगे बढ़ रहे हैं।
2014 के बाद टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव
रोहित नरूला बताते हैं कि 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद टैक्स प्रक्रिया में व्यापक बदलाव हुआ। डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन सिस्टम ने टैक्स फाइलिंग को सरल बनाया है। पहले लोग फिजिकल फॉर्म भरने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से कतराते थे, लेकिन अब ऑनलाइन सुविधा ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बना दिया है।
नतीजा यह हुआ कि टैक्स चोरी की घटनाओं में कमी आई है और टैक्सदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज भारत में करीब 10 करोड़ लोग टैक्स भरते हैं, हालांकि यह संख्या देश की 140 करोड़ की जनसंख्या के मुकाबले अभी भी बेहद कम है। नरूला कहते हैं –
“यही विडंबना है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में से एक भारत में टैक्स बेस अब भी सीमित है। अगर ज्यादा लोग टैक्स देंगे तो विकास की रफ्तार और बढ़ेगी।”
बदलती सोच और नई पीढ़ी की जागरूकता
वरिष्ठ वकील बताते हैं कि उनकी 35 साल की प्रैक्टिस में यह सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है कि अब लोग स्वेच्छा से टैक्स भरने आते हैं।
पहले ऐसा नहीं था –
सरकारी नौकरी करने वालों के लिए टैक्स रिटर्न अनिवार्य था।
फैक्ट्रियों और मिल मालिकों को लोन लेने के लिए टैक्स दिखाना मजबूरी थी।
आम लोग टैक्स को बोझ मानते थे और उससे बचने की कोशिश करते थे।
लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। आम जनता खुद ऑफिस आकर कहती है – “टैक्स भर दीजिए।” लोग अब समझने लगे हैं कि टैक्स देना सिर्फ सरकार को पैसा देना नहीं, बल्कि अपने देश की उन्नति में सीधा योगदान करना है।
टैक्स से चलता है विकास का पहिया
रोहित नरूला स्पष्ट कहते हैं कि टैक्स भरने से ही सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और गरीबों के कल्याण की योजनाएं चला पाती है।
उनके अनुसार –
“आज भारत ऐसा देश है जहां कोई भूखा नहीं सोता। सरकार हर जरूरतमंद तक भोजन और सुविधा पहुँचाने के लिए सक्षम है। यह सब टैक्स की वजह से संभव हुआ है।”
सरकार ने हाल ही में 1 लाख रुपये महीना तक की आमदनी और 12 लाख सालाना आमदनी पर टैक्स माफ किया है। इससे मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायियों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, बाज़ार में पैसों का प्रवाह (money circulation) भी तेज हुआ है जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
पारिवारिक संघर्ष से सामाजिक प्रतिष्ठा तक
रोहित नरूला का परिवार मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखता है। भारत-पाकिस्तान विभाजन (1947) के बाद उनका परिवार संघर्षों से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ आकर बसा।
उनके पिता एयर फोर्स में नौकरी करते थे और घर की आर्थिक स्थिति साधारण थी।
नरूला बताते हैं –
“हम दो भाई हैं और हमने संघर्ष के दौर में कड़ी मेहनत कर सामाजिक प्रतिष्ठा बनाई। आज समाज में हमें पहचान मिली है तो यह हमारी मेहनत और ईमानदारी का परिणाम है।”
आज उनके परिवार में बेटा और बेटी हैं, जो अपनी पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ रहे हैं।
अपने जीवन की आत्मकथा की किताब लिखा है।
केवल वकालत ही नहीं, रोहित नरूला ने अपने जीवन पर एक पुस्तक भी लिखी है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाले नरूला ने अंग्रेजी में किताब प्रकाशित की है, जिसमें टैक्स के महत्व और नागरिकों की जिम्मेदारी को समझाने की कोशिश की गई है।
उनका मानना है कि –
“जिस देश में हम रहते हैं, वहाँ टैक्स देना हर नागरिक का कर्तव्य है। टैक्स सिर्फ बोझ नहीं, बल्कि एक निवेश है जो सीधे-सीधे हमारे बच्चों के भविष्य और देश की प्रगति पर खर्च होता है।”
समाज के लिए संदेश
35 साल के अनुभव से नरूला का मानना है कि टैक्स को लेकर अब भी बहुत सी भ्रांतियाँ हैं। लोग इसे सिर्फ कानूनी प्रक्रिया मानते हैं जबकि हकीकत में यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
वे कहते हैं –
“अगर आज 10 करोड़ लोग टैक्स भर रहे हैं तो यह संख्या 25-30 करोड़ तक पहुँचे, तभी भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।”
मायने
वरिष्ठ टैक्स वकील रोहित नरूला की यह सोच हमें याद दिलाती है कि टैक्स सिर्फ व्यक्तिगत दायित्व नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है।
आज जब भारत तेजी से विकास कर रहा है, तब टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। टैक्स का हर रुपया सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और सामाजिक योजनाओं के माध्यम से जनता तक लौटकर आता है।
नरूला कहते हैं –
“टैक्स भरना देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है। जो जितना ईमानदारी से टैक्स देगा, देश उतनी ही तेजी से प्रगति करेगा।”
रोहित नरूला, बीएससी एलएलबी, रायपुर (छत्तीसगढ़) में 35 वर्षों से टैक्स प्रैक्टिस कर रहे हैं। टैक्स जागरूकता पर किताब के लेखक और समाजसेवी के रूप में भी सक्रिय।
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