Nutritionपोषण भी, पढ़ाई भी: भारत के भविष्य के लिए खेल-आधारित शिक्षा की नई पहल
पोषण भी, पढ़ाई भी: भारत के भविष्य के लिए खेल-आधारित शिक्षा की नई पहल
नई दिल्ली। भारत के विकास का आधार उसके सबसे छोटे नागरिक हैं। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों को सिर्फ़ पोषण स्थल से आगे बढ़ाकर बच्चों की पहली पाठशाला बनाने का बड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की “पोषण भी, पढ़ाई भी” पहल बच्चों की शुरुआती शिक्षा को खेल और गतिविधियों के ज़रिए मज़बूत कर रही है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी विकास यात्रा के केंद्र में बच्चों को रखा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने यह मान्यता दी कि मस्तिष्क का 85% विकास छह वर्ष की उम्र से पहले ही हो जाता है, इसलिए निवेश जीवन के शुरुआती वर्षों में होना चाहिए।
वैज्ञानिक अध्ययन और शोध का समर्थन
सीएमसी वेल्लोर के अध्ययन के अनुसार, 18-24 महीने तक बच्चों को व्यवस्थित देखभाल व शिक्षा मिलने पर उनका IQ पाँच साल की उम्र तक 19 अंकों तक बढ़ा पाया गया।
अंतर्राष्ट्रीय शोध बताते हैं कि पाँच साल की उम्र से पहले गुणवत्तापूर्ण ईसीसीई (Early Childhood Care and Education) पाने वाले बच्चों का शैक्षणिक प्रदर्शन और सामाजिक कौशल 67% बेहतर होता है।
नोबेल विजेता डॉ. जेम्स हेकमैन के अनुसार, प्रारंभिक बाल्यावस्था में निवेश पर 13-18% तक रिटर्न मिलता है, जो किसी भी अन्य शिक्षा या प्रशिक्षण से अधिक है।
आंगनवाड़ी में बड़ा बदलाव
“पोषण भी, पढ़ाई भी” पहल के तहत—
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को खेल-आधारित व गतिविधि-आधारित शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शिक्षण सामग्री का बजट बढ़ाया गया और हर महीने ECCE दिवस मनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम-आधारशिला (3-6 वर्ष आयु वर्ग के लिए) लागू की गई, जो बौद्धिक, भावनात्मक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर केंद्रित है।
“5+1 साप्ताहिक योजना” के तहत बच्चों का दिन खेल, भाषा, रचनात्मकता और मोटर स्किल्स को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से शुरू होता है और बाहरी खेल व बातचीत के साथ समाप्त होता है।
माता-पिता की भूमिका और नई पहल ‘नवचेतना’
जन्म से तीन साल तक की आयु को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने “नवचेतना” नामक राष्ट्रीय ढाँचे की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य माता-पिता और देखरेखकर्ताओं को घर पर ही सरल व खेल-आधारित गतिविधियों के ज़रिए बच्चों के विकास में भागीदार बनाना है।
हर बच्चे के लिए समान अवसर
जहाँ उच्च आय वाले परिवार खिलौनों और किताबों में निवेश कर सकते हैं, वहीं सरकार कम आय वाले परिवारों तक समान अवसर पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। “पोषण भी, पढ़ाई भी” और “नवचेतना” के ज़रिए हर बच्चे तक शिक्षा और पोषण पहुँचाना सुनिश्चित किया जा रहा है।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा—
"खेल कोई विलासिता नहीं है, यह सीखने का आधार है। राष्ट्र निर्माण की शुरुआत उसके सबसे छोटे नागरिकों के पोषण और शिक्षा से होती है। भारत का हर बच्चा जीवन की सही शुरुआत का हक़दार है।"
👉 यह पहल भारत के भविष्य को मज़बूत नींव देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
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