छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया सूर्योदय : अब कोई स्कूल शिक्षक विहीन नहीं एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में 80% की कमी, शिक्षा व्यवस्था को मिली नई दिशा
छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया सूर्योदय : अब कोई स्कूल शिक्षक विहीन नहीं,एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में 80% की कमी, शिक्षा व्यवस्था को मिली नई दिशा
रायपुर, 14 जून 2025।छत्तीसगढ़ ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। अब प्रदेश का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी स्तर तक सभी विद्यालयों में आवश्यकतानुसार शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। राज्य में एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में 80 प्रतिशत तक कमी आई है।
यह परिवर्तन युक्तियुक्तकरण की नीति के माध्यम से संभव हो सका। इसका उद्देश्य प्रदेश के शैक्षणिक संसाधनों का न्यायसंगत और प्रभावी उपयोग करते हुए, शिक्षकों की तर्कसंगत पदस्थापना और स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम तथा नई शिक्षा नीति के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करना रहा।
तीन चरणों में चली काउंसलिंग, दूरस्थ जिलों में भी राहत
पूर्व में प्रदेश में 453 विद्यालय शिक्षक विहीन थे और 5936 विद्यालयों में केवल एक ही शिक्षक पदस्थ था। विशेषकर सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे संवेदनशील जिलों में यह समस्या अधिक थी। इसे दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जिला, संभाग और राज्य स्तर पर तीन चरणों में शिक्षकों की काउंसलिंग कराई। परिणामस्वरूप अब कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है और सभी हाई स्कूलों में न्यूनतम आवश्यक शिक्षकों की तैनाती की जा चुकी है।
1207 प्राथमिक विद्यालयों पर विशेष फोकस
प्रदेश में अब 1207 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक कार्यरत है। इन शालाओं में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए पदोन्नति, नई नियुक्तियां और तात्कालिक पदस्थापन की रणनीति तैयार की गई है।
जिलावार आंकड़े :
बस्तर : 283
बीजापुर : 250
सुकमा : 186
मोहला-मानपुर-चौकी : 124
कोरबा : 89
बलरामपुर : 94
नारायणपुर : 64
धमतरी : 37
सूरजपुर : 47
दंतेवाड़ा : 11
अन्य जिले : 22
इन स्कूलों में जल्द ही आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
शिक्षा में समावेशिता और समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा को समावेशी बनाने और हर बच्चे तक समान अवसर पहुँचाने की दिशा में निर्णायक साबित हुआ है। यह पूरी प्रक्रिया केवल प्रशासनिक कवायद न होकर, सामाजिक न्याय आधारित शिक्षा सुधार है। इसके केंद्र में हर बच्चा, हर गांव और हर स्कूल को रखा गया है।
छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि देशभर के लिए एक मिसाल है, जिसमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम के पालन के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और समानता की दिशा में ठोस पहल की गई है।
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