NHMMI अस्पताल का लाइसेंस निरस्त: सेवा के नाम पर लूट, अब कानून का शिकंजा
संपादक - श्रीप्रकाश तिवारी 9074886140
रायपुर - छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का चर्चित NHMMI अस्पताल आखिरकार अपने कारनामों के चलते विवादों में घिर गया है। स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट और राज्य सरकार के निर्देश के बाद अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। कलेक्टर कार्यालय से नोटिस जारी कर एक महीने की वैधानिक अवधि के पश्चात यह कार्रवाई की गई, जिससे अस्पताल प्रबंधन, स्टाफ और मरीजों में हड़कंप मच गया है।
भारती देवी खेमानी की मौत से जुड़ा मामला बना आधार
पूरा मामला स्वर्गीय भारती देवी खेमानी की मौत से जुड़ा हुआ है। परिजनों का आरोप है कि मरीज के गंभीर हालत में होने के बावजूद NHMMI अस्पताल ने लापरवाही बरती, और इलाज के नाम पर लगभग 15 लाख रुपये की अवैध वसूली कर डाली। इलाज में असफल रहने के बाद, परिजनों को 1 करोड़ रुपये का इलाज अनुमान थमा दिया गया और मरीज को हैदराबाद रेफर कर दिया गया।
हैरान करने वाली बात यह रही कि एयर एम्बुलेंस में ना डॉक्टर था, ना वेंटिलेटर, और ना ही कोई जीवन रक्षक उपकरण। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों में विमान को वापस रायपुर एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। इस दौरान मरीज की स्थिति और बिगड़ गई और वापसी मार्ग में उसकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की जांच और दोष सिद्ध
पीड़ित परिजनों द्वारा दिए गए दस्तावेज़ी साक्ष्यों के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने इलाज में लापरवाही, मेडिकल स्टाफ की गैर-हाजिरी, एयर एम्बुलेंस में जीवन रक्षक सुविधा के अभाव, और अनुचित बिलिंग को लेकर NHMMI अस्पताल को दोषी पाया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अस्पताल ने ट्रांसफर की प्रक्रिया में Rule Schedule 1, Section 3.2 और 3.3 का स्पष्ट उल्लंघन किया है, जिसमें यह निर्देशित है कि मरीज को रेफर करने से पूर्व स्थिर करना आवश्यक होता है और सभी मेडिकल दस्तावेज एवं डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
कार्रवाई: एक माह के नोटिस के बाद लाइसेंस निरस्त
राज्य शासन की अनुशंसा और कलेक्टर कार्यालय की कानूनी प्रक्रिया के तहत, अस्पताल को एक माह की नोटिस अवधि दी गई, जो अब समाप्त हो चुकी है। इसके बाद अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। इससे अस्पताल के वर्तमान में भर्ती मरीजों को अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
चैरिटी ट्रस्ट या मुनाफाखोरी का केंद्र?
NHMMI अस्पताल मूल रूप से MMI ट्रस्ट के तहत संचालित होता है, जिसे समाज सेवा और गरीबों को सस्ती चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। लेकिन सूत्रों की मानें तो एक बड़े उद्योगपति परिवार द्वारा ट्रस्ट पर नियंत्रण कर इसे मेडिकल व्यापार का केंद्र बना दिया गया, जहां चिकित्सा सेवा के नाम पर लूट मचाई जा रही थी।
समाजसेवियों की मांग: हत्या का प्रकरण दर्ज हो
स्वर्गीय भारती देवी खेमानी के परिवार सहित, अन्य दर्जनों पीड़ितों ने पुलिस और प्रशासन से अस्पताल प्रबंधन और ट्रस्ट संचालकों पर हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह एक ‘मेडिकल मर्डर’ का मामला है, जिसमें मरीज की जान महज़ पैसे के लालच में चली गई।
IMA और सिविल सोसाइटी तक पहुंची शिकायतें
NHMMI अस्पताल पर सिर्फ यही एक आरोप नहीं है। अलग-अलग दरों पर मेडिकल जांच, अत्यधिक बिलिंग, और जानबूझकर मरीज को गुमराह करने जैसे कई मामलों की शिकायतें IMA और सिविल सोसाइटी तक पहुंची हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ट्रस्ट के नाम पर अस्पताल कर लाभ में छूट ले रहा है, लेकिन व्यवहार में यह एक पूर्ण रूप से मुनाफाखोर संस्थान बन गया है।
रायपुर का NHMMI अस्पताल अब जनसेवा के नाम पर घोटाले और लापरवाही का प्रतीक बन गया है। देर से सही, लेकिन प्रशासन द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को कुछ राहत मिली है। अब यह देखना बाकी है कि क्या राज्य सरकार दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर आगे की सख्त कार्रवाई करती है या यह मामला भी बीते दिनों की खबर बनकर रह जाएगा।
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