ज्यादा मजदूरी की लालच में जारी है पलायन, बस्तर के सीमावर्ती जिलों से मजदूरों का रुख अन्य राज्यों की ओर

Migration continues due to the lure of higher wages, workers from the border districts of Bastar are moving towards other states ज्यादा मजदूरी की लालच में जारी है पलायन, बस्तर के सीमावर्ती जिलों से मजदूरों का रुख अन्य राज्यों की ओर
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ज्यादा मजदूरी की लालच में जारी है पलायन, बस्तर के सीमावर्ती जिलों से मजदूरों का रुख अन्य राज्यों की ओर

ज्यादा मजदूरी की लालच में जारी है पलायन, बस्तर के सीमावर्ती जिलों से मजदूरों का रुख अन्य राज्यों की ओर

बस्तर, 20 मई — छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सीमावर्ती जिलों से मजदूरों का पलायन लगातार जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध होने के बावजूद लोग ज्यादा मजदूरी की लालच में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं।

जानकारों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर मनरेगा में काम तो मिल रहा है, लेकिन मजदूरी अपेक्षाकृत कम है और भुगतान में देरी भी एक बड़ा कारण है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठता जा रहा है। वहीं, अन्य राज्यों में ईंट भट्ठों, निर्माण कार्यों और कृषि मजदूरी में ज्यादा मेहनताना मिलने के चलते लोग जोखिम उठाकर सैकड़ों किलोमीटर दूर काम करने निकल रहे हैं।

खासकर सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह पलायन ज्यादा देखने को मिल रहा है। इन जिलों के सैकड़ों परिवार अपने गांवों को छोड़कर काम की तलाश में पलायन कर रहे हैं, जिससे गांवों में श्रमिकों की कमी भी महसूस की जा रही है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर समय रहते मनरेगा के तहत मजदूरी दर में सुधार और समय पर भुगतान की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह पलायन और तेज हो सकता है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा बल्कि सामाजिक असंतुलन भी बढ़ेगा।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, मजदूरों को गांवों में ही टिकाए रखने के लिए नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर फिलहाल नजर नहीं आ रहा।

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