कर्रेगुट्टा पहाड़ पर था नक्सलियों का सुरक्षित किला 250 बंकर हॉस्पिटल हथियारों की फैक्ट्रियां तबाह
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में हाल ही में सुरक्षा बलों द्वारा एक अभूतपूर्व और निर्णायक अभियान चलाया गया, जिसे 'ऑपरेशन संकल्प' नाम दिया गया। यह ऑपरेशन 21 अप्रैल से 11 मई 2025 तक चला और इसे अब तक का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान माना जा रहा है।
ऑपरेशन की प्रमुख उपलब्धियाँ
31 हार्डकोर नक्सली ढेर: इनमें 16 महिलाएं और पीएलजीए बटालियन-1 तथा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के शीर्ष सदस्य शामिल थे।
210 से अधिक बंकर नष्ट: सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए 210 से अधिक बंकरों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।
हथियार निर्माण इकाइयाँ और गोला-बारूद जब्त: चार हथियार निर्माण इकाइयों को नष्ट किया गया और भारी मात्रा में हथियार तथा गोला-बारूद बरामद किया गया।
450 से अधिक आईईडी निष्क्रिय: सुरक्षा बलों ने 450 से अधिक आईईडी को निष्क्रिय किया, हालांकि 15 विस्फोटों में 18 जवान घायल हुए।
1.72 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली ढेर: मारे गए नक्सलियों में कुल 1.72 करोड़ रुपये के इनामी शामिल थे।
सेना बड़ी चुनौतियाँ:
यह ऑपरेशन लगभग 1,200 वर्ग किलोमीटर के दुर्गम और बारूदी सुरंगों से भरे क्षेत्र में चलाया गया। करीब 28,000 जवानों ने इस अभियान में भाग लिया, जिसमें सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा और ग्रेहाउंड्स जैसे विशेष बल शामिल थे।
केंद्रीय गृहमंत्री प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए कहा कि अब भारतीय तिरंगा उन पहाड़ियों पर लहरा रहा है, जो कभी नक्सलियों के गढ़ थे। उन्होंने इसे सरकार की 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की रणनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
'ऑपरेशन संकल्प' ने नक्सलियों की रणनीतिक क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर किया है। इससे क्षेत्र में शांति और विकास की संभावनाएँ बढ़ी हैं। यह अभियान सुरक्षा बलों की दृढ़ संकल्प और समर्पण का प्रतीक है, जो देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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