दंतेवाड़ा के युवाओं की आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरणादायक यात्रा आईआईएम में उद्यमिता प्रशिक्षण से बदली जीवन की दिशा

Inspiring journey of Dantewada youth towards self-reliance Entrepreneurship training at IIM changed the direction of life दंतेवाड़ा के युवाओं की आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरणादायक यात्रा आईआईएम में उद्यमिता प्रशिक्षण से बदली जीवन की दिशा
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दंतेवाड़ा के युवाओं की आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरणादायक यात्रा आईआईएम में उद्यमिता प्रशिक्षण से बदली जीवन की दिशा

दंतेवाड़ा के युवाओं की आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरणादायक यात्रा आईआईएम में उद्यमिता प्रशिक्षण से बदली जीवन की दिशा

रायपुर, 16 जून 2025।कभी चुनौतियों और सीमित अवसरों के बीच संघर्ष कर रहे दंतेवाड़ा के युवाओं के जीवन में अब उम्मीद की नई किरण जग चुकी है। यह सकारात्मक बदलाव आया है एक अनूठी और अभूतपूर्व पहल के माध्यम से, जिसमें भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर, दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार की अहम भूमिका रही है।

13 जून 2025 को आईआईएम रायपुर में उद्यमिता सर्टिफिकेट प्रोग्राम बैच-2 का समापन समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं बांटे गए, बल्कि युवाओं के सपनों को हकीकत की उड़ान दी गई। दो महीने के इस आवासीय कार्यक्रम में दंतेवाड़ा के 50 चयनित युवाओं को उद्योग, व्यवसाय और नवाचार के विभिन्न पहलुओं की गहराई से शिक्षा दी गई।

बदली सोच, बढ़ा आत्मविश्वास

कभी संसाधनों की कमी और अस्थिर माहौल में जीवन जीने वाले दंतेवाड़ा के युवा अब अपने व्यवसायिक सपनों को साकार करने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण में शामिल राकेश यादव ने कहा, "आईआईएम ने सिखाया कि हमारे जंगल का महुआ और इमली भी रोज़गार का सशक्त साधन बन सकते हैं। अब मैं सिर्फ सपने नहीं देखता, उन्हें साकार करने की दिशा में बढ़ चुका हूँ।"

किरंदुल के अभिषेक गुप्ता, बीजापुर के तेजस्व कुमार और नीलम पांडे ने भी बताया कि यह प्रशिक्षण उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हो रहा है। वहीं, बचेली की शिल्पा कुमारी ने कहा कि प्रशिक्षण के जरिए न केवल व्यवसाय शुरू करने की तकनीक सीखी, बल्कि यह भी जाना कि अपने क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का उपयोग कर किस तरह आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

प्रशासन और संस्थान का संयुक्त प्रयास

इस प्रेरणादायक पहल की सफलता में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही। कलेक्टर कुणाल दुदावत की सतत पहल और मार्गदर्शन से यह सपना साकार हुआ। प्रशासन ने युवाओं का चयन कर उन्हें आईआईएम रायपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में भेजने की व्यवस्था कर यह दिखा दिया कि यदि सोच बदल दी जाए तो हालात भी बदले जा सकते हैं।

आईआईएम रायपुर ने 23 अप्रैल से 13 जून तक इन युवाओं को सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं दिया, बल्कि उनके भीतर नेतृत्व क्षमता और नवाचार की चिंगारी को ज्वाला में बदल दिया। प्रशिक्षण में व्यवसाय योजना निर्माण, मार्केटिंग, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, डिजिटल टूल्स का उपयोग और फील्ड विजिट सहित कई व्यावहारिक विषय शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला

प्रशिक्षण के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युवाओं से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा, "बस्तर के युवाओं में असीम ऊर्जा और क्षमता है। यदि उन्हें सही दिशा और अवसर मिले, तो वे न केवल अपनी किस्मत बदल सकते हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।"

बस्तर में आत्मनिर्भरता की ओर नया अध्याय

यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य की मजबूत नींव है। जिस क्षेत्र को कभी संघर्ष और अस्थिरता के लिए जाना जाता था, अब वहीं महुआ आधारित उद्योग, इमली प्रसंस्करण इकाइयाँ और स्थानीय पर्यटन जैसे नए व्यवसाय विकसित हो रहे हैं।

यह कहानी केवल दंतेवाड़ा के 50 युवाओं की नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की है, जो अब नकारात्मक छवि को पीछे छोड़ उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का उदाहरण बन रहा है। जिला प्रशासन और आईआईएम रायपुर के इस सामूहिक प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मंशा साफ हो और मार्गदर्शन सटीक मिले, तो हर बाधा को अवसर में बदला जा सकता है।

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