रायपुर में हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर के ठिकानों पर इनकम टैक्स का छापा, अवैध संपत्ति और हथियार बरामद
रायपुर में हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर के ठिकानों पर इनकम टैक्स का छापा, अवैध संपत्ति और हथियार बरामद
रायपुर, 8 जून 2025 – राजधानी रायपुर में रविवार को इनकम टैक्स विभाग और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर और उसके भाई रोहित तोमर के ठिकानों पर छापेमारी की गई। यह कार्रवाई अवैध संपत्ति, टैक्स चोरी और सूदखोरी के मामलों में की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
करोड़ों की संपत्ति और हथियार बरामद
आईटी और पुलिस टीम ने वीरेंद्र और रोहित तोमर के घर से 37 लाख रुपये नकद, 734 ग्राम सोने के आभूषण, 125 ग्राम चांदी, चार लग्ज़री गाड़ियां, iPad, लैपटॉप, चेकबुक, ATM कार्ड, DVR, स्टांप पेपर, जमीनों से जुड़े दस्तावेज, नोट गिनने की मशीन, पांच तलवारें, एक रिवॉल्वर, एक पिस्टल और बड़ी संख्या में जिंदा व आबादी कारतूस बरामद किए हैं।
टीम ने वीरेंद्र और रोहित के भतीजे दिव्यांश प्रताप तोमर को भी हिरासत में लिया है, जो पूछताछ के दौरान हर सवाल पर सिर्फ यही कह रहा है – “चाचा को सब पता है।” पुलिस दिव्यांश से लगातार पूछताछ कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है।
निगम भी जुटा जानकारी में
रायपुर नगर निगम की टीम भी इस कार्रवाई में शामिल रही। जोन 8 के कमिश्नर हितेंद्र यादव के अनुसार, "वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हमारी टीम वीरेंद्र तोमर के घर पहुंची और मकान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। उनकी संपत्ति का आकलन किया जा रहा है। निर्माण लागत, करों का भुगतान और बेनामी संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।"
सूदखोरी का बड़ा नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र और रोहित ने लोगों को शुद्ध खोरी के जाल में फंसा कर करोड़ों रुपये वसूले हैं। उनका डर इतना था कि कुछ कर्जदारों को वे रिवॉल्वर और पिस्टल दिखाकर धमकाते थे। पुलिस को शक है कि ये हथियार कर्ज वसूली और दबदबा कायम रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।
अंडा ठेले से लेकर सूदखोर बनने तक
पुलिस अब यह जानने में जुटी है कि एक साधारण अंडा ठेले से शुरुआत करने वाला वीरेंद्र तोमर इतना बड़ा सूदखोर कैसे बन गया। जांच में सामने आया है कि 2006 में एक व्यापारी पर चाकू से हमला करने के बाद वीरेंद्र पर कई आपराधिक केस दर्ज हुए और वह जेल गया। जेल में उसकी मुलाकात बाहरी राज्यों के कुख्यात अपराधियों से हुई। जेल से रिहा होने के बाद उसने सूद पर पैसे देने का धंधा शुरू किया, जो धीरे-धीरे संगठित अवैध कारोबार में बदल गया।
मददगारों की तलाश में पुलिस
पुलिस अब वीरेंद्र और रोहित तोमर के उन मददगारों की कुंडली खंगाल रही है, जिन्होंने इन्हें संरक्षण दिया या इनकी संपत्तियां संभालीं। यह भी आशंका है कि कुछ बेनामी संपत्तियां इनके खास सहयोगियों के नाम पर हो सकती हैं। पुलिस इनकी पहचान और भूमिका की जांच कर रही है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0