हाईकोर्ट में सुनवाई : 14वें मंत्री की नियुक्ति पर उठे सवाल

In review: Questions raised on the petition of the 14th minister हाईकोर्ट में सुनवाई : 14वें मंत्री की नियुक्ति पर उठे सवाल
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हाईकोर्ट में सुनवाई : 14वें मंत्री की नियुक्ति पर उठे सवाल

हाईकोर्ट में सुनवाई : 14वें मंत्री की नियुक्ति पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 14वें मंत्री की नियुक्ति के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरू की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि उन्होंने अब तक समाजसेवा के क्षेत्र में क्या कार्य किया है? दरअसल, याचिकाकर्ता ने खुद को समाजसेवी बताते हुए यह याचिका दायर की है।

मामला क्या है?

प्रदेश की भाजपा सरकार ने 20 अगस्त को तीन नए मंत्रियों को शपथ दिलाई थी। इससे कैबिनेट का आकार 11 से बढ़कर 14 हो गया। इसी नियुक्ति को चुनौती देते हुए रायपुर निवासी बसंतेश्वर चक्रवर्ती ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट किशोर भादुड़ी और एडवोकेट अभ्युदय सिंह ने दलील दी कि वर्ष 2016 में मोहम्मद अकबर की याचिका पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मंत्रिमंडल की संख्या 13 से अधिक नहीं हो सकती। सुनवाई के दौरान संसदीय सचिव प्रकरण का भी उल्लेख किया गया।

याचिका में क्या कहा गया है?

14वें मंत्री की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया गया है।

याचिका में सामान्य प्रशासन विभाग, मुख्यमंत्री और सभी 14 मंत्रियों को पक्षकार बनाया गया है।

नियम क्या कहते हैं?

संविधान के मुताबिक, किसी भी राज्य में मंत्रिमंडल का आकार विधानसभा की कुल सीटों का 15% से अधिक नहीं हो सकता।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं।

इस आधार पर मंत्रियों की अधिकतम संख्या 13.50 (यानी 13) हो सकती है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 14 है, जिसे याचिका में 15% से अधिक बताते हुए चुनौती दी गई है।

👉 अब अगली सुनवाई में हाईकोर्ट तय करेगा कि छत्तीसगढ़ में 14 मंत्रियों की नियुक्ति संवैधानिक है या नहीं।

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