एक माह में जोगी की प्रतिमा नहीं लगी तो होगा आंदोलन: अमित जोगी की चेतावनी
एक माह में जोगी की प्रतिमा नहीं लगी तो होगा आंदोलन: अमित जोगी की चेतावनी
पेंड्रा रोड, छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संस्थापक स्वर्गीय अजीत जोगी की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार, 29 मई को पेंड्रा रोड स्थित उनकी समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्व धर्म प्रार्थना सभा, भजन संध्या और सद्भावना रैली जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में स्व. जोगी के पुत्र और जनता कांग्रेस (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगले एक माह के भीतर पेंड्रा में अजीत जोगी की प्रतिमा नहीं लगाई गई, तो वे जनांदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा, "पांच साल से हम केवल आश्वासन सुन रहे हैं। अब इंतजार खत्म हो गया है। अगर सरकार ने जोगी जी की प्रतिमा नहीं लगाई तो हम आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।"
राजनीति में अद्वितीय छवि के धनी थे अजीत जोगी
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने स्वर्गीय अजीत जोगी को एक ऐसा राजनेता बताया जिनकी कार्यशैली और मिलनसार स्वभाव के कारण उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक बन जाते थे। उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ को प्रशासनिक रूप से दिशा दी, बल्कि समाज के हर वर्ग से जुड़कर एक समरसता का माहौल बनाया।
अजीत जोगी को याद करते हुए कहा गया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ को निकट से देखा, समझा और इसकी मूल समस्याओं को पहचाना। वे अक्सर कहते थे कि यह “अमीर धरती के गरीब लोगों” का प्रदेश है – एक ऐसा प्रदेश जो खनिज संपदा जैसे कोयला, लोह अयस्क, बॉक्साइट, हीरा और सोने से भरपूर है, लेकिन जहां जनता अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
सद्भावना रैली और प्रार्थना सभा
पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सद्भावना रैली में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। यह रैली पेंड्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरते हुए समाधि स्थल पर समाप्त हुई। रैली का उद्देश्य सामाजिक एकता और जोगी जी के विचारों के प्रचार-प्रसार को समर्पित था। समाधि स्थल पर आयोजित सर्व धर्म प्रार्थना सभा में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अजीत जोगी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं कीं।
राजनीतिक संकेत और अगला कदम
कार्यक्रम के दौरान अमित जोगी ने स्पष्ट किया कि यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवित रखने का संकल्प भी है। उन्होंने कहा, “अजीत जोगी छत्तीसगढ़ की आत्मा में बसे हैं। उनकी प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि इस राज्य की आत्मा की पहचान होगी।”
समापन और भावनात्मक माहौल
भजन संध्या में स्थानीय कलाकारों और अनुयायियों ने जोगी जी के पसंदीदा भजनों की प्रस्तुति दी। पूरे कार्यक्रम में एक भावनात्मक और श्रद्धामयी वातावरण बना रहा। हजारों लोगों ने समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
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