IIT भिलाई को मिला विस्तार का वरदान, 6,576 नई सीटों से बढ़ेगा तकनीकी शिक्षा का दायरा

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IIT भिलाई को मिला विस्तार का वरदान, 6,576 नई सीटों से बढ़ेगा तकनीकी शिक्षा का दायरा

देश में तकनीकी शिक्षा को नई उड़ान देने की दिशा में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ के आईआईटी भिलाई सहित देश के पांच प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के शैक्षणिक और अवसंरचना विकास को मंजूरी दी गई है।

छत्तीसगढ़ के लिए यह फैसला एक बड़ी सौगात के रूप में आया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक नई शुरुआत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा।

चार वर्षों में 6,576 नई सीटें, 130 प्रोफेसरों की भर्ती

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत योजना के तहत वर्ष 2025-26 से 2028-29 के बीच कुल 11,828.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बजट से पांच IITs—भिलाई (छत्तीसगढ़), तिरुपति (आंध्र प्रदेश), जम्मू, धारवाड़ (कर्नाटक) और पालक्काड़ (केरल)—में शैक्षणिक सीटों की संख्या को मौजूदा 7,111 से बढ़ाकर 13,687 किया जाएगा।

आईआईटी भिलाई की बात करें तो यहां न केवल सीटों में बढ़ोतरी होगी, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त नई इमारतों, प्रयोगशालाओं और शोध केंद्रों का निर्माण भी किया जाएगा। इस विस्तार के चलते 130 नए प्रोफेसर पदों का सृजन होगा, जो न केवल पढ़ाई बल्कि शोध और नवाचार को भी बढ़ावा देंगे।

रोजगार और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस विस्तार परियोजना से स्थानीय स्तर पर भी बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। निर्माण कार्यों से लेकर शिक्षक-शोधकर्ता नियुक्तियों तक, रोजगार के कई नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही छात्रावास, आवास, परिवहन और सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अनुसंधान को मिलेगा नया आयाम

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन पांचों संस्थानों में अत्याधुनिक अनुसंधान पार्क स्थापित किए जाएंगे, जो उद्योगों और अकादमिक जगत के बीच सेतु का काम करेंगे। इससे स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार को गहरा प्रोत्साहन मिलेगा।

स्थायी परिसर से उड़ान भरेगा आईआईटी भिलाई

आईआईटी भिलाई पहले से ही अपने स्थायी परिसर में कार्यरत है, लेकिन इस नई योजना के लागू होने से यह संस्थान और अधिक छात्रों तथा शोधकर्ताओं के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनेगा।

छत्तीसगढ़ की तकनीकी उड़ान में यह एक नया अध्याय है।

देश की प्रगति में तकनीकी संस्थानों की भूमिका को देखते हुए यह फैसला न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के तकनीकी भविष्य को एक नई दिशा देगा

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