"Hi-tech police's hands are empty! "हाईटेक पुलिस के हाथ खाली! 3 महीने से फरार वीरेंद्र-रोहित तोमर, गिरफ्तारी पर उठे सवाल"
3 महीने बाद भी वीरेंद्र और रोहित तोमर पुलिस की पकड़ से बाहर, चार्जशीट दाखिल लेकिन गिरफ्तारी पर सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर को फरार हुए तीन महीने से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम रही है। पुलिस ने 2222 पन्नों की चार्जशीट पेश कर अपनी औपचारिकता पूरी तो कर दी, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि इसमें दोनों हिस्ट्रीशीटर का कोई जिक्र तक नहीं है।
चार्जशीट में पुलिस ने तोमर परिवार की बहुएं शुभ्रा सिंह (41) और भावना सिंह (30) के अलावा दिव्यांश सिंह (25), बंटी सहारे (35) और जितेंद्र देवांगन (24) को आरोपी बनाया है। इन पांचों पर अदालत में जल्द ही आरोप तय किए जाएंगे।
सूदखोरी के कारोबार का खुलासा
पुलिस की जांच में सामने आया है कि शुभ्रा सिंह और भावना सिंह ने सूदखोरी के लिए कंपनी बनाई थी। इसी कंपनी के जरिए लोगों को ऊंची ब्याज दरों पर पैसा दिया जाता और बाद में दबाव डालकर वसूली की जाती थी।
दिव्यांश सिंह पूरा हिसाब-किताब संभालता था और लोगों के घर जाकर धमकी देने का काम करता था।
जितेंद्र देवांगन और बंटी सहारे वसूली और दबंगई का जिम्मा देखते थे।
दोनों पर आरोप है कि वे लोगों के घर पर हंगामा करते, सामान उठाकर ले जाते और तोमर भाइयों के लिए दबाव बनाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि इस कारोबार से जुड़ी कई प्रॉपर्टी भी शुभ्रा और भावना के नाम पर खरीदी गई हैं।
तोमर बंधु अब भी फरार
हालांकि पुलिस ने चार्जशीट में वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर को फरार बताया है, लेकिन दोनों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। यही वजह है कि पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता पूछ रही है कि जब छत्तीसगढ़ पुलिस खुद को हाईटेक बताती है और बड़े-बड़े मामलों में आरोपी देश के कोने-कोने से पकड़कर लाती है, तो आखिर दो हिस्ट्रीशीटर को ढूंढने में इतनी नाकामी क्यों?
क्या नेताओं का संरक्षण है वजह?
लोगों का आरोप है कि कहीं न कहीं पुलिस और नेताओं का संरक्षण ही है, जिसकी वजह से वीरेंद्र और रोहित अब तक गिरफ्तारी से बाहर हैं। चर्चा यह भी है कि पुलिस ने इस मामले में भारी-भरकम रकम वसूली कर ली है और अब कार्रवाई का दिखावा मात्र किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वीरेंद्र तोमर का परिवार रायपुर के आसपास ही रह रहा है। उनके मकान पर दो गार्ड हमेशा तैनात रहते हैं, जो बराबर फरार भाइयों से संपर्क में रहते हैं। यदि पुलिस चाहे तो इन गार्ड से पूछताछ कर आसानी से लोकेशन पता लगा सकती है, लेकिन सवाल यही है कि पुलिस ऐसा क्यों नहीं करना चाहती?
कोर्ट में होगी अगली सुनवाई
अब यह मामला कोर्ट में पहुंच चुका है। चार्जशीट पर जल्द ही सुनवाई होगी और पांचों आरोपियों पर चार्ज तय होंगे। वहीं, पुलिस का कहना है कि वीरेंद्र और रोहित की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं, लेकिन हकीकत यह है कि तीन महीने बीतने के बाद भी हाथ खाली ही हैं।
जनता के मन में उठ रहे सवाल
लोग खुले तौर पर सवाल उठा रहे हैं –
क्या पुलिस जानबूझकर वीरेंद्र और रोहित तोमर को गिरफ्तार नहीं कर रही?
क्या कुछ नेताओं और अफसरों का संरक्षण इन हिस्ट्रीशीटर भाइयों को मिला हुआ है?
आखिर ऐसा क्या राज है कि रायपुर के आसपास रह रहा पूरा परिवार पुलिस की नजर में है, लेकिन दोनों आरोपी नहीं?
साफ है कि इस मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तक वीरेंद्र और रोहित की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक यह चर्चा थमने वाली नहीं है कि "दाल में कुछ काला" जरूर है।
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