ऑनलाइन सट्टेबाज़ों और साइबर ठगों का पैसा मैनेज करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार, 65 करोड़ का ट्रांजैक्शन उजागर

Gang of online bookmakers and cyber fraudsters busted, three arrested, Rs 65 crore transaction exposed ऑनलाइन सट्टेबाज़ों और साइबर ठगों का पैसा मैनेज करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार, 65 करोड़ का ट्रांजैक्शन उजागर
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ऑनलाइन सट्टेबाज़ों और साइबर ठगों का पैसा मैनेज करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार, 65 करोड़ का ट्रांजैक्शन उजागर

ऑनलाइन सट्टेबाज़ों और साइबर ठगों का पैसा मैनेज करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार, 65 करोड़ का ट्रांजैक्शन उजागर

पुलिस ने पकड़े 85 बैंक खातों के दस्तावेज, हाई-टेक नेटवर्क का खुलासा

रायपुर साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने शुक्रवार को पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 85 बैंक खातों के दस्तावेज बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन खातों के माध्यम से पिछले डेढ़ साल में करीब 65 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया है।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?

पुलिस के अनुसार, जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम और पते निम्नलिखित हैं:

विनोद भवानी (उम्र 35 वर्ष), निवासी इंद्रप्रस्थ कॉलोनी

अरविंद गुप्ता (उम्र 56 वर्ष), निवासी सिद्धार्थ चौक

विनय संघवाणी (उम्र 31 वर्ष)

ये तीनों आरोपित ऑनलाइन सट्टेबाज़ों और साइबर ठगों के लिए “पैसा मैनेजमेंट” का काम कर रहे थे। जैसे ही ठगी या सट्टे से पैसा आता, ये उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते ताकि उसकी ट्रेसिंग मुश्किल हो।

6-7 खातों में तुरंत ट्रांसफर होती थी राशि

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी रूटीन तौर पर एक तय प्रक्रिया के तहत काम करते थे:

जैसे ही किसी एक बैंक खाते में पैसा आता,

वे तुरंत उसे 6-7 अन्य खातों में ट्रांसफर कर देते,

जिससे मूल स्रोत को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।

इसके बाद यह पैसा या तो नकद निकाला जाता था या डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता।

पुलिस ने क्या बरामद किया?

85 बैंक खातों के दस्तावेज

कई मोबाइल फोन और लैपटॉप, जिनमें लेन-देन की जानकारी

फर्जी आईडी और सिम कार्ड

ऑनलाइन सट्टा एप्स से जुड़ी जानकारी

पुलिस का बयान

पुलिस अधिकारियों के अनुसार

> “यह एक सुव्यवस्थित नेटवर्क है जो ऑनलाइन सट्टेबाज़ी और साइबर ठगी से जुड़े अपराधियों के लिए वित्तीय लेन-देन संभालता है। आरोपियों ने खुद कोई ठगी नहीं की, लेकिन उनका नेटवर्क ठगों की रीढ़ बन चुका था।”

अगला कदम

अब पुलिस बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल डेटा, और डिजिटल ट्रेल की फॉरेंसिक जांच कर रही है। संभावना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी कई बड़े नाम जल्द सामने आ सकते हैं

इस खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि साइबर क्राइम और सट्टेबाज़ी के पीछे एक संगठित वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा है। ऐसे मामलों में सिर्फ अपराधियों को पकड़ना काफी नहीं, बल्कि पैसा मैनेज करने वाले मास्टरमाइंड्स को पकड़ना ज्यादा जरूरी होता है – और पुलिस ने इस दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।

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