"धर्मांतरण से घर वापसी की ओर: छत्तीसगढ़ के 35 परिवारों ने फिर थामा सनातन धर्म"

"From conversion to homecoming: 35 families of Chhattisgarh embraced Sanatan Dharma again"
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"धर्मांतरण से घर वापसी की ओर: छत्तीसगढ़ के 35 परिवारों ने फिर थामा सनातन धर्म"

छत्तीसगढ़: सक्ती जिले में 35 परिवारों ने छोड़ा ईसाई धर्म, वापस लौटे सनातन परंपरा में

सक्ति (छत्तीसगढ़), अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में धर्मांतरण विवाद के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यहां ईसाई धर्म अपना चुके 35 परिवारों ने पुनः सनातन धर्म में वापसी की है। यह घर वापसी कार्यक्रम अखिल भारतीय घर वापसी संगठन के तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन झोबा आश्रम में किया गया, जिसमें धर्म सेना मातृशक्ति, सत्ती एवं अन्य संगठनों की उपस्थिति रही। इस मौके पर "शिव शक्ति रूद्र महाभिषेक" का आयोजन कर सभी परिवारों को विधिपूर्वक पुनः सनातन धर्म में दीक्षा दी गई।

प्रमुख नेतृत्व और संगठन की भूमिका

घर वापसी संगठन के प्रमुख और भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि इन परिवारों की वापसी समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है। जूदेव ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में संगठन द्वारा लगभग 15,000 परिवारों की घर वापसी कराई जा चुकी है।

कविता सुमन ने सुनाई अपनी आपबीती

सपरेली की कविता सुमन ने मंच से बोलते हुए कहा, "मुझे बहकाकर धर्मांतरण कराया गया था। मसीही समाज के लोग मेरी मदद का भरोसा देकर मुझे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते थे। अब मैं अपने पूर्वजों के धर्म में लौटकर गौरव महसूस कर रही हूं।"

सेवा के बदले सौदा गलत’ – संगठन का कड़ा बयान

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने मिशनरियों पर तीखा हमला करते हुए कहा, "ये लोग स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं और सेवा के बदले धर्म परिवर्तन कराते हैं। यह बहुत ही चिंताजनक है।" उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ सख्त कानून की आवश्यकता है।

संगठन के अन्य सदस्यों ने भी दोहराया कि "सेवा के बदले सौदा करना गलत है। धर्म प्रचार अलग बात है, लेकिन किसी दूसरे धर्म का अपमान करना और दुष्प्रचार करना अस्वीकार्य है।"

कार्यक्रम में कई प्रमुख धर्माचार्यों की उपस्थिति

इस आयोजन में राष्ट्रीय कथा वाचिका दीदी प्रज्ञा भारती, झोबा आश्रम के संरक्षक स्वामी दिव्यानंद (ओम बाबा), स्वामी कौशलेंद्र कृष्ण महाराज, अंजू जयनारायण गबेल, आयुष शर्मा, परमहंस अयज, कपिल शास्त्री, आचार्य राकेश, राजा सत्ति धर्मेंद्र सिंह समेत कई अन्य धर्माचार्य और सहयोगी उपस्थित रहे।

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