पूर्व विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव पर भ्रष्टाचार का आरोप, शिकायतकर्ता बोले - "अब राष्ट्रपति से करूंगा गुहार"
पूर्व विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव पर भ्रष्टाचार का आरोप, शिकायतकर्ता बोले - "अब राष्ट्रपति से करूंगा गुहार"
रायपुर, 16 जून 2025। छत्तीसगढ़ में पूर्व विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के खिलाफ गंभीर आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भ्रष्टाचार और सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता कैलाश चंद्र लाडवा ने एक बार फिर न्याय की गुहार लगाई है।
कैलाश चंद्र लाडवा का कहना है कि टी.एल. ध्रुव ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक पद का दुरुपयोग करते हुए उनके साथ जातिगत भेदभाव किया और भ्रष्टाचार उजागर करने पर उन्हें साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की। आरोप है कि जब कैलाश लाडवा ने भ्रष्टाचार की शिकायत की, तो टी.एल. ध्रुव ने उनके खिलाफ झूठे जातिसूचक प्रकरण दर्ज करवा दिए।
बाद में जांच में यह आरोप असत्य पाए गए, लेकिन इसके बावजूद टी.एल. ध्रुव ने उनके साथ लगातार अन्याय और उत्पीड़न जारी रखा। आरोप है कि जबरिया रिटायरमेंट देने में भी टी.एल. ध्रुव की सीधी भूमिका रही, जिससे कैलाश चंद्र लाडवा को अपनी नौकरी, पेंशन और परिवार की जिम्मेदारियों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
कैलाश चंद्र लाडवा ने बताया कि वर्ष 2013 से ही टी.एल. ध्रुव के भ्रष्टाचार और भेदभाव की शिकायतें सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में दी जा चुकी हैं। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि "ऐसे भ्रष्ट और मनमानी करने वाले अधिकारी के कारण कई ईमानदार कर्मचारी और अधिकारी जीवनभर परेशान होते हैं और उनके परिवार भी पीड़ित रहते हैं।"
न्यायालय और जांच एजेंसियों में लंबित मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यायालय रायपुर से दिनांक 17 दिसंबर 2014 में उक्त प्रकरण पर आदेशित किया गया था। न्यायालय में संपूर्ण जांच प्रतिवेदन पेश करने का आदेश भी पुलिस और संबंधित एजेंसियों को दिया गया है। मामला फिलहाल रायपुर एंटी करप्शन पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 22/2025 धारा 20/25 के तहत पंजीबद्ध है।
सूत्रों के मुताबिक, ACB के अधिकारी भी इस मामले से अवगत हैं, लेकिन कार्रवाई अब तक लंबित है। कैलाश लाडवा ने अब राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाने की घोषणा की है।
बेनामी संपत्ति की भी मांग की जांच
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि टी.एल. ध्रुव ने अपने कार्यकाल में भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति अर्जित की है। उनकी चल-अचल संपत्ति की भी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता की पीड़ा
कैलाश चंद्र लाडवा का कहना है कि "एक ईमानदार कर्मचारी होने के बावजूद मुझे भ्रष्टाचार उजागर करने की सजा मिली। नौकरी, पेंशन और मान-सम्मान सब छिन गया। न्याय के लिए दर-दर भटक रहा हूं। अब आखिरी उम्मीद राष्ट्रपति से ही है।"
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