खरोरा, तिल्दा और आरंग क्षेत्र में फ्लाई ऐश का कहर – जनजीवन पर गहरा प्रभाव
खरोरा, तिल्दा और आरंग क्षेत्र में फ्लाई ऐश का कहर – जनजीवन पर गहरा प्रभाव
रायपुर (छत्तीसगढ़): खरोरा, तिल्दा और आरंग क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बारिश के चलते फ्लाई ऐश (Fly Ash) की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। सड़क किनारे और गांवों की ज़मीन पर भारी मात्रा में फ्लाई ऐश डंप किए जाने से न सिर्फ़ आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि यह स्थानीय जनजीवन, पर्यावरण और पशुधन के लिए भी खतरा बन गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले केवल सड़क किनारे खेतों में फ्लाई ऐश डंप की जा रही थी, लेकिन अब इसे पक्की डामर सड़कों और गांवों के मुख्य रास्तों पर भी बिना किसी अनुमति के फेंका जा रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण यह फ्लाई ऐश बहकर नालियों में भर रही है जिससे जल निकासी बाधित हो रही है और गांवों की गलियों में जलजमाव हो रहा है।
खेल मैदान और पशुधन भी प्रभावित
फ्लाई ऐश की वजह से गांवों के बच्चों के खेल मैदान तक प्रभावित हो रहे हैं। यह महीन और भुरभुरी राख होती है, जिसमें चलने पर मवेशी जैसे गाय-भैंस फंस जाती हैं और खुद को निकाल नहीं पातीं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
भूजल भी हो रहा प्रदूषित
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश में मौजूद रासायनिक तत्व भूजल को दूषित कर सकते हैं। इसके कारण धीवरा, माठ, बंगोली, कोटा और मुरा जैसे आसपास के गांवों में जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंपों और कुओं के पानी में बदलाव देखा जा रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से इस पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। वे चाहते हैं कि फ्लाई ऐश के डंपिंग पर नियंत्रण लगाया जाए और उचित निपटान की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवनशैली को सुरक्षित रखा जा सके।
फ्लाई ऐश का अव्यवस्थित निपटान केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप ले रहा है। जरूरत है कि सरकार और उद्योग दोनों इस पर जिम्मेदारी से कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में इसका भयावह असर रोका जा सके।
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