ED action: Team reached PCC headquarters ईडी की कार्रवाई : सुकमा कांग्रेस भवन निर्माण को लेकर पीसीसी मुख्यालय में पहुंची टीम, चालान की कॉपी सौंपी
ईडी की कार्रवाई : सुकमा कांग्रेस भवन निर्माण को लेकर पीसीसी मुख्यालय में पहुंची टीम, चालान की कॉपी सौंपी
रायपुर, 8 सितंबर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। सोमवार दोपहर राजधानी रायपुर स्थित शंकर नगर के पीसीसी मुख्यालय राजीव भवन में ईडी की एक टीम पहुंची। टीम ने यहां प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के महामंत्री प्रशासन मलकीत सिंह गेदू से मुलाकात की और उन्हें एक चालान की कॉपी सौंपी।
ईडी की ओर से दिए गए इस चालान में सुकमा जिला कांग्रेस भवन के निर्माण से जुड़ी जानकारियों का उल्लेख है। बताया गया है कि इस भवन के निर्माण में खर्च की गई राशि पर ईडी को संदेह है, जिसके चलते पीसीसी से पहले ही लिखित में हिसाब-किताब मांगा गया था।
गेदू ने ईडी को सौंपा था पूरा हिसाब
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने कुछ समय पहले पीसीसी को नोटिस जारी कर सुकमा कांग्रेस भवन निर्माण पर किए गए खर्च का ब्योरा मांगा था। पीसीसी की ओर से यह ब्योरा महामंत्री मलकीत सिंह गेदू ने ही तैयार कर ईडी को सौंपा था। अब ईडी ने इस मामले में चालान की कॉपी पीसीसी को थमा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
ईडी ने अटैच किया था भवन
यहां यह बताना जरूरी है कि ईडी पहले ही सुकमा कांग्रेस भवन को अटैच कर चुकी है। ईडी का आरोप है कि इस भवन के निर्माण के लिए धनराशि कथित रूप से छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले से जुटाई गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस घोटाले से निकली रकम का उपयोग राजनीतिक भवन खड़ा करने में किया गया।
कवासी लखमा पर निगाह
ईडी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सुकमा कांग्रेस भवन का निर्माण तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा की निगरानी में हुआ था। शराब घोटाले की जांच में लखमा की भूमिका सामने आने के बाद ईडी ने उन्हें हिरासत में लिया था। वर्तमान में वे रायपुर जेल में बंद हैं। ईडी के मुताबिक, घोटाले से प्राप्त अवैध धन का एक बड़ा हिस्सा पार्टी से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों में लगाया गया, जिसमें सुकमा भवन प्रमुख उदाहरण है।
राजनीतिक हलचल तेज
ईडी की इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा इस मामले को कांग्रेस शासन की भ्रष्ट नीतियों का सबूत मान रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ईडी बार-बार केवल विपक्षी दलों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस सरकार की कथित "लूट" का नतीजा बताया है।
ईडी की पड़ताल और आगे की कार्रवाई
ईडी अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है। चालान की कॉपी सौंपने के बाद माना जा रहा है कि एजेंसी पीसीसी से प्राप्त हिसाब-किताब और अपने पास मौजूद सबूतों का मिलान करेगी। अगर खर्च और प्राप्त राशि के बीच गड़बड़ी पाई जाती है तो कांग्रेस नेताओं पर और भी कड़ी कार्रवाई संभव है।
शराब घोटाले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले का खुलासा पिछले साल हुआ था। ईडी का आरोप है कि इस घोटाले में हजारों करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी संरक्षण में बड़े पैमाने पर शराब की बिक्री से कमीशन की मोटी रकम निकाली गई और इस रकम को विभिन्न माध्यमों से सफेद किया गया। इसी रकम से सुकमा कांग्रेस भवन जैसे निर्माण कार्य कराए गए।
मायने
ईडी की इस ताजा कार्रवाई ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक जंग को और तेज कर दिया है। जहां कांग्रेस इसे केंद्र सरकार की राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रही है, वहीं भाजपा लगातार कांग्रेस नेताओं से जवाब मांग रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में ईडी की आगे की जांच और कार्रवाई से इस प्रकरण में कौन-कौन से नए खुलासे होते हैं।
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