धर्मांतरण और अनुसूचित जाति-जनजाति दर्जे को लेकर देशभर में बहस तेज़, छत्तीसगढ़-बस्तर में विवाद

Debate over religious conversion and SC-ST status intensifies across the country, dispute in Chhattisgarh-Bastar धर्मांतरण और अनुसूचित जाति-जनजाति दर्जे को लेकर देशभर में बहस तेज़, छत्तीसगढ़-बस्तर में विवाद
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धर्मांतरण और अनुसूचित जाति-जनजाति दर्जे को लेकर देशभर में बहस तेज़, छत्तीसगढ़-बस्तर में विवाद

धर्मांतरण और अनुसूचित जाति-जनजाति दर्जे को लेकर देशभर में बहस तेज़, छत्तीसगढ़-बस्तर में विवाद

रायपुर। देश के कई आदिवासी बहुल इलाकों में बढ़ते धर्मांतरण और उसके सामाजिक प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है। खासकर छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान और झारखंड के कई गाँवों में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां और धर्मांतरण के बाद सामाजिक पहचान और अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।

कानूनी स्थिति क्या है?

हाईकोर्ट एडवोकेट हिमांशु निगम बताते हैं कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों को ही मिलता है। यदि कोई व्यक्ति धर्मांतरण कर ईसाई या अन्य धर्म अपना लेता है, तो उसका SC दर्जा बना रहेगा या नहीं — यह अदालत तय करती है। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा व्यक्ति के रीति-रिवाज़ों और आदिवासी परंपराओं से जुड़ा होता है। यदि धर्म बदलने के बाद भी व्यक्ति अपने जनजातीय रीति-रिवाजों का पालन करता है, तो वह ST का दर्जा बनाए रख सकता है।

बस्तर और बांसवाड़ा में बढ़ता विवाद

बस्तर और बांसवाड़ा ज़िले के कई गांवों में ईसाई मिशनरी संस्थाएं हैंडपंप और बाइबिल के संदेश वाले पत्थर लगवा रही हैं। लिखा गया है कि “इस जल को पीने वाला फिर प्यासेगा, लेकिन यीशु के कुंए से पीने वाला अनंत काल तक प्यासा नहीं रहेगा।”

इस बीच, बस्तर के कई गांवों में धर्मांतरण के कारण अब शव दफनाने तक का विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों ने मांग की है कि धर्मांतरण कर ईसाई बने व्यक्ति का शव गांव में दफनाने की अनुमति न दी जाए। नारायणपुर और अंबिकापुर में भी ऐसे टकराव सामने आए हैं।

अंबिकापुर के बहरापारा में 25 घरों में से 19 परिवारों ने बीते 10 सालों में ईसाई धर्म अपना लिया है। छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पनालाल ने इसे ‘सरकारी उत्पीड़न’ बताया है।

जशपुर और अन्य जिलों में हालात

जशपुर के सिटोंगा गांव में 400 में से 270 परिवार ईसाई बन चुके हैं। 20 साल पहले जहां गांव में 1 चर्च था, अब हर घर पर ईसाई धर्म के झंडे लगे हैं। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर और रायपुर जिले में धर्मांतरण कराने के आरोप में 10 लोगों पर एफआईआर भी दर्ज हुई है।

राजस्थान के डूंगरगढ़धना, मध्यप्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार, रतलाम और छतरपुर जिलों में भी ऐसे ही हालात हैं। यहां कई लोग नाम से ईसाई हैं लेकिन पिता का नाम और उपनाम हिंदू रखा गया है।

लोगों की राय और अनुभव

गांव के थॉमस पिता जयराम सिंधारिया ने बताया कि बीमारी के समय चर्च जाकर प्रार्थना करने से ठीक हो जाने पर उन्होंने धर्म बदल लिया। वहीं मिशनरी स्कूल में नौकरी करने वाले जॉबियर निनामा ने कहा कि उन्होंने ईसाई धर्म तो अपनाया, पर आदिवासी परंपराएं भी मानते हैं।

गांव की लगभग 25% आबादी अब धर्मांतरण कर चुकी है। यही स्थिति कई अन्य जिलों में भी बन रही है।

धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति-जनजाति दर्जा, सामाजिक अधिकार और परंपराओं को लेकर देश के कई आदिवासी इलाकों में असमंजस और तनाव की स्थिति बन रही है। वहीं, संविधान के तहत SC दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध को ही दिया जाता है, जबकि ST दर्जा रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है।

धर्मांतरण और सामाजिक तकरार को लेकर राज्य सरकारों और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

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