DMF घोटाला: 6000 पन्नों की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, अफसर-नेता गठजोड़ से करोड़ों का खेल
रायपुर. बहुचर्चित डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) घोटाले में एसीबी-ईओडब्ल्यू की जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में 6000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है, जिसमें रानू साहू, सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है। दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि इस घोटाले में नौकरशाही और राजनीति का गहरा गठजोड़ सामने आया है।
चार्जशीट में क्या है खास:
एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने करीब 18 महीने की जांच के बाद चार्जशीट तैयार की।
दस्तावेजों के मुताबिक डीएमएफ फंड का दुरुपयोग कर करोड़ों की अवैध निकासी की गई।
ठेकेदारों को मनचाही रकम दी गई, बदले में मोटा कमीशन नेताओं-अफसरों को मिला।
ईमेल, बैंक ट्रांजेक्शन, और कॉल रिकॉर्डिंग से मिली पुख्ता जानकारी।
चार्जशीट में 200 से ज्यादा गवाहों के बयान शामिल।
कौन-कौन है आरोपी:
1. रानू साहू – पूर्व कलेक्टर, मुख्य भूमिका में
2. सौम्या चौरसिया – तत्कालीन सीएमओ, आर्थिक फैसलों में प्रभाव
3. सूर्यकांत तिवारी – रसूखदार कारोबारी, कनेक्शन हर स्तर पर
4. साथ ही छह अन्य ठेकेदार और अफसर जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
क्या है DMF:
डीएमएफ यानी जिला खनिज न्यास फंड, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया फंड है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका प्रयोग निजी लाभ और राजनीतिक फायदे के लिए हुआ – ऐसा एसीबी का दावा है।
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