छत्तीसगढ़ का बड़ा घोटाला: DMF फंड में 75 करोड़ का कमीशन, रानू साहू, सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी के खिलाफ 6000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
छत्तीसगढ़ का बड़ा घोटाला: DMF फंड में 75 करोड़ का कमीशन, रानू साहू, सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी के खिलाफ 6000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
रायपुर/कोरबा, 28 मई 2025 — छत्तीसगढ़ में जिला खनिज निधि (DMF) से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मंगलवार को राज्य की पूर्व आईएएस अधिकारी रानू साहू, पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया, और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत 9 आरोपियों के खिलाफ 6000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की है।
EOW की जांच में सामने आया है कि DMF के तहत ठेके दिलवाने के एवज में लगभग 75 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कमीशन वसूला गया, जो 40% तक के तय कमीशन रेट पर आधारित था। यह रकम नीचे से ऊपर तक “सिस्टम” में वितरित की गई थी और इसका इस्तेमाल रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति खरीदने, निवेश और अन्य गुप्त लेनदेन में किया गया।
🔍 क्या है DMF फंड और कैसे हुआ घोटाला?
जिला खनिज निधि (District Mineral Foundation Fund) का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और कल्याणकारी योजनाएं लागू करना है। लेकिन जांच में सामने आया है कि इस फंड का दुरुपयोग संगठित रूप से किया गया, जहां ठेकेदारों को 40% तक कमीशन देकर काम दिलवाए गए और उच्च अधिकारियों से लेकर छोटे कर्मचारियों तक यह पैसा पहुंचाया गया।
🧾 चार्जशीट के मुख्य बिंदु:
चार्जशीट में 6000 पन्नों में विस्तार से पेश किए गए हैं:
बैंक लेनदेन के प्रमाण
कॉल रिकॉर्डिंग्स और डिजिटल चैट्स
फर्जी कंपनियों के दस्तावेज
संपत्ति खरीद से जुड़े पेपर
ईमेल और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता
रानू साहू (तत्कालीन कलेक्टर, कोरबा), सौम्या चौरसिया (पूर्व उपसचिव) और सूर्यकांत तिवारी (प्रभावशाली कारोबारी) पर सिंडिकेट बनाकर घोटाले को अंजाम देने का आरोप है।
करीब 75 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की गई, जिसे रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीद, फर्जी निवेश और शेल कंपनियों में डाला गया।
🧑💼 और कौन हैं रडार पर?
9 आरोपियों के अलावा EOW ने राज्य के 9 अन्य कारोबारी और ठेकेदारों को संदिग्ध के रूप में चिन्हित किया है, जिनकी भूमिका की जांच चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में दो और वरिष्ठ IAS अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। यदि उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो अगली चार्जशीट में उनके नाम भी शामिल हो सकते हैं।
🏢 इन विभागों में हुआ था फंड का दुरुपयोग:
EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि निम्नलिखित विभागों में बजट जारी कर फंड का दुरुपयोग किया गया:
1. ग्रामीण विकास विभाग
2. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
3. नगर विकास विभाग
4. स्कूल शिक्षा विभाग
5. लोक निर्माण विभाग (PWD)
इन विभागों के नाम पर कार्य स्वीकृत किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर या तो काम अधूरा रहा या फर्जी तरीके से पूरा दिखाकर रकम निकाल ली गई।
⚖️ अगले कदम: जब्ती और गिरफ्तारी की तैयारी
जांच एजेंसी अब जमीन, संपत्ति और बैंक खातों की जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
जल्द ही चार्जशीट में नामित आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है।
ED और आयकर विभाग पहले से इस नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग जांच कर रहे हैं।
💬 प्रशासन और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह घोटाला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस सिंडिकेट को वर्षों से राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा।
EOW के अधिकारी ने कहा:
> "यह संगठित आर्थिक अपराध है जिसमें सत्ता, सिस्टम और व्यवसाय का गठजोड़ सामने आया है। हम हर कड़ी की जांच कर रहे हैं।"
🧮 घोटाले की टाइमलाइन (संक्षेप में):
घटना तारीख
DMF घोटाले की प्रारंभिक जांच शुरू जुलाई 2023
पहली FIR दर्ज मार्च 2024
EOW द्वारा छापेमारी जून 2024
आरोपियों की संपत्तियां सील नवंबर 2024
चार्जशीट दाखिल मई 2025
✅ निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का DMF घोटाला अब राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में गिना जा रहा है। एक ओर जहां ये घटना यह दर्शाती है कि कैसे लोक-कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग हो सकता है, वहीं यह भी उम्मीद जगी है कि कानून की पकड़ से कोई बच नहीं सकता।
अब नजरें अदालत की कार्यवाही और दोषियों को मिलने वाली सजा पर टिकी हैं।
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