छत्तीसगढ़ में प्राचार्य प्रमोशन पर हाईकोर्ट सख्त: रोक के बावजूद दी गई ज्वॉइनिंग, सभी नियुक्तियां अमान्य घोषित

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छत्तीसगढ़ में प्राचार्य प्रमोशन पर हाईकोर्ट सख्त: रोक के बावजूद दी गई ज्वॉइनिंग, सभी नियुक्तियां अमान्य घोषित

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया में राज्य सरकार की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब प्रमोशन पर रोक लगी हुई थी, तो इस दौरान किसी भी तरह की नियुक्ति या ज्वॉइनिंग कैसे दी जा सकती है।

क्या है मामला?

राज्य सरकार ने 30 अप्रैल को प्राचार्य पदों पर प्रमोशन की सूची जारी की थी, जबकि 28 मार्च को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया था कि अगली सुनवाई तक कोई आदेश जारी नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद, 1 मई को हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी, लेकिन शिक्षा विभाग ने 2 मई को स्थगन आदेश की सूचना जिलों में दी, जिससे कुछ प्राचार्यों को ज्वॉइनिंग दे दी गई।

हाईकोर्ट की टिप्पणी:

बुधवार को जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से पूछा कि आदेश के बाद भी शिक्षकों को प्राचार्य पद पर कैसे ज्वॉइन कराया गया। यह मामला अदालत के आदेश की अवमानना का है।

अगली सुनवाई:

हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित की है। तब तक प्रमोशन और ज्वॉइनिंग की कोई भी प्रक्रिया नहीं चलेगी।

शिक्षक संघ की प्रतिक्रिया:

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा न्यायालय में पक्ष रखा गया है, नए सत्र में रिक्त स्कूलों को प्राचार्य मिल जाएंगे।

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