छत्तीसगढ़ बनेगा हेल्थकेयर हब, एएचपीआई ने स्वास्थ्य क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की उठाई मांग
छत्तीसगढ़ में निजी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) के छत्तीसगढ़ चैप्टर ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से स्वास्थ्य क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता और महासचिव अतुल सिंघानिया ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर यह अपील की है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल 900 से अधिक निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं, जो जनस्वास्थ्य सेवा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में इन्हें कमर्शियल श्रेणी में रखा गया है, जिससे बैंकिंग, बिजली, कर्ज जैसी सेवाओं की लागत अपेक्षाकृत अधिक है। एएचपीआई का तर्क है कि जिस प्रकार राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है, उसी तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाओं को भी यह दर्जा मिलना चाहिए।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि यदि स्वास्थ्य को उद्योग का दर्जा मिलता है तो इससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, सेवाओं की लागत में कमी आएगी और सुदूर इलाकों में छोटे-छोटे अस्पतालों के विस्तार को गति मिलेगी। इससे राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी और युवा चिकित्सक भी निवेश के लिए आगे आएंगे।
पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन करते हुए एफएआर को 1.5 से बढ़ाकर 3.0 कर दिया है और ग्राउंड कवरेज को 60% से 70% किया गया है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंडों का अधिकतम उपयोग संभव होगा, जो विशेष रूप से एमएसएमई और हेल्थ स्टार्टअप्स के लिए फायदेमंद रहेगा।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि एफएआर में वृद्धि से अस्पताल अपने कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा और बिस्तरों की संख्या बढ़ा सकेंगे। इससे दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की राह खुलेगी।
एएचपीआई छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में नीति बदलाव के लिए आवश्यक पहल करें ताकि राज्य मध्य भारत का एक प्रमुख मेडिकल हब बन सके।
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