छत्तीसगढ़: धान पर समर्थन मूल्य में 69 रुपए की बढ़ोतरी को कांग्रेस ने बताया ऊंट के मुंह में जीरा, आंदोलन की चेतावनी

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छत्तीसगढ़: धान पर समर्थन मूल्य में 69 रुपए की बढ़ोतरी को कांग्रेस ने बताया ऊंट के मुंह में जीरा, आंदोलन की चेतावनी

धान की फसल पर केंद्र सरकार द्वारा किए गए समर्थन मूल्य में महज ₹69 की बढ़ोतरी को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस ने इसे किसानों के साथ धोखा करार दिया है और सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने तीखा हमला करते हुए कहा कि मोदी सरकार किसान विरोधी एजेंडे पर काम कर रही है।

“69 रुपए की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा”

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मौजूदा हालात में जब खाद, बीज, डीजल, बिजली और कीटनाशकों की कीमतें आसमान छू रही हैं, उस वक्त मात्र ₹69 की बढ़ोतरी किसानों के साथ मजाक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है।

“किसानों की आय नहीं, लागत चार गुना बढ़ी”

ठाकुर ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार ने सालों पहले किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, जो अब तक अधूरा है। उल्टा किसानों की कृषि लागत चार गुना तक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि खाद-बीज से लेकर ट्रैक्टर के टायर तक सब महंगा हो गया, लेकिन किसान की फसल का दाम वही पुराना है।

पिछली बार भी नहीं मिला पूरा दाम

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पिछली बार समर्थन मूल्य में ₹117 की बढ़ोतरी तो हुई थी, लेकिन किसानों को 3217 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों का हक डकार लिया था। इस बार भी 3100 रुपए प्रति क्विंटल के वादे के साथ बढ़े हुए समर्थन मूल्य ₹186 जोड़कर 3286 रुपए प्रति क्विंटल देने की मांग की है।

कांग्रेस का आंदोलन का ऐलान

कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह किसानों को उनका हक दिलाने के लिए आंदोलन करेगी। धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को मजबूर करेंगे कि वह किसानों से 3286 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदे। साथ ही पिछली बार के 117 रुपए प्रति क्विंटल की बकाया राशि किसानों के खातों में जमा करने की भी मांग की जाएगी।

कांग्रेस सरकार का दिया उदाहरण

उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में धान की खरीदी 2500 रुपए में की गई थी, और साथ ही बढ़े हुए समर्थन मूल्य को जोड़कर कुल 2800 रुपए प्रति क्विंटल तक दिया गया था। भाजपा को भी उसी नीति पर काम करना चाहिए।

कृषि नीति पर फिर गरमाएगा सियासी तापमान

माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य को लेकर फिर एक बार प्रदेश की राजनीति गर्म हो सकती है। कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं भाजपा का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

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