बोरे-बासी का स्वाद रह गया थाली तक सीमित: कांग्रेस ने मनाया, पर सोशल मीडिया भूला 'छत्तीसगढ़ी शान'

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बोरे-बासी का स्वाद रह गया थाली तक सीमित: कांग्रेस ने मनाया, पर सोशल मीडिया भूला 'छत्तीसगढ़ी शान'

एक वक्त था जब 'बोरे-बासी' खाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती थीं। IAS-IPS से लेकर नेता और आम लोग तक, हर कोई इस पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन की तस्वीरें पोस्ट करता था। लेकिन इस बार तस्वीरें गायब हैं, कैम्पेन ठंडा है और सियासी बयान भी सुनाई नहीं दे रहे।

छत्तीसगढ़ में 1 मई को ‘बोरे-बासी दिवस’ मनाने की परंपरा पिछली कांग्रेस सरकार के वक्त शुरू हुई थी। सोशल मीडिया पर इसका इतना प्रचार हुआ कि यह एक वर्चुअल त्योहार बन गया था। लेकिन इस बार कांग्रेस ने भले ही आंतरिक रूप से इस दिन को याद किया, लेकिन न तो कोई बड़ा कैम्पेन चला और न ही अफसरों की पोस्ट वायरल हुईं।

क्या है बोरे-बासी?

छत्तीसगढ़ी घरों में परंपरागत रूप से खाया जाने वाला यह भोजन उबले हुए चावल (बासी) को पानी में भिगोकर, नमक, प्याज, या हरी मिर्च के साथ खाया जाता है। इसे गर्मी में शरीर को ठंडा रखने वाला देसी उपाय माना जाता है।

क्यों फीका पड़ा स्वाद?

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहल अब सरकार के एजेंडे में नहीं है। पहले जहां सरकारी विभाग और अफसर बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे, अब यह पहल पूरी तरह कांग्रेस के आंतरिक स्तर पर सिमट कर रह गई है।

पिछली बार क्या हुआ था?

2022 और 2023 में ट्विटर और फेसबुक पर हजारों पोस्ट्स आई थीं

कई जिलों में ‘बोरे-बासी भोज’ आयोजित हुए थे

IAS, IPS और जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें बनी थीं चर्चा का विषय

इस बार क्या बदला?

न कोई बड़ा इवेंट

न सोशल मीडिया पर कोई ट्रेंड

केवल कुछ नेताओं की व्यक्तिगत पोस्ट

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