बीजापुर में छात्रावास की छात्राओं के गर्भवती होने का मामला: प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप, POCSO कानून के पालन पर उठे सवाल

Bijapur hostel girl pregnant: Management accused of negligence, POCSO Act enforcement questioned
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बीजापुर में छात्रावास की छात्राओं के गर्भवती होने का मामला: प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप, POCSO कानून के पालन पर उठे सवाल

बीजापुर में छात्रावास की छात्राओं के गर्भवती होने का मामला: प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप, POCSO कानून के पालन पर उठे सवाल

बीजापुर छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों में स्कूली छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीजापुर जिले के सरकारी कन्या आवासीय छात्रावास में पढ़ने वाली तीन छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सामने आने से शिक्षा व्यवस्था और छात्रावास प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इस संवेदनशील मामले में हॉस्टल और स्कूल प्रबंधन ने न केवल लापरवाही बरती, बल्कि मामले को दबाने की कोशिश भी की।

जानकारी के अनुसार यह मामला जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित एक हायर सेकेंडरी आवासीय छात्रावास का है। यहां पढ़ने वाली तीन छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें से दो छात्राएं नाबालिग बताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी मिलने के बाद लगभग पांच महीने पहले ही उन्हें विद्यालय से निकाल दिया गया था।

परीक्षा देने पहुंचीं तो खुला मामला

सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को जब दो छात्राएं 12वीं कक्षा का अंतिम पेपर देने स्कूल पहुंचीं, तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। तीसरी छात्रा 11वीं कक्षा की बताई जा रही है। तीनों छात्राओं का नाम आवासीय पोर्टा केबिन (आरएमएसए) में दर्ज बताया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा इन छात्राओं के गर्भावस्था कार्ड भी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं छात्रावास अधीक्षिका का कहना है कि यह घटना उनके कार्यकाल की नहीं है। दूसरी ओर स्थानीय सरपंच के अनुसार छात्राओं ने गंगालूर स्थित आवासीय पोर्टा केबिन में रहने की बात स्वीकार की है।

मामले को दबाने के आरोप

सूत्रों का कहना है कि छात्रावास और स्कूल प्रबंधन ने इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। छात्राओं को चुपचाप विद्यालय से निकाल दिया गया और पुलिस या बाल संरक्षण विभाग को इसकी जानकारी नहीं दी गई। लेकिन जब छात्राएं परीक्षा देने स्कूल पहुंचीं, तब मामला उजागर हो गया और मीडिया सहित अन्य लोगों तक इसकी जानकारी पहुंची।

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच और कार्रवाई की बात कही है।

यह पहली घटना नहीं

बीजापुर सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इससे पहले भी छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं के गर्भवती होने के मामले सामने आते रहे हैं।

बीजापुर (मार्च 2026):

हाल ही में बीजापुर के एक आवासीय स्कूल की तीन छात्राएं गर्भवती पाई गईं। इससे पहले मार्च 2024 में भी जिले के एक पोर्टा केबिन स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया था।

कोरबा (जनवरी 2025):

कोरबा जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 11वीं कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा ने छात्रावास के शौचालय में बच्ची को जन्म दिया था। रिपोर्ट के अनुसार छात्रा ने नवजात को खिड़की से बाहर फेंक दिया था, जिससे बच्ची की हालत गंभीर हो गई थी। इस मामले में लापरवाही बरतने पर छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल निलंबित कर दिया गया था।

सुकमा (नवंबर 2024):

सुकमा जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की 12वीं कक्षा की छात्रा दीपावली की छुट्टियों के बाद छात्रावास लौटी तो मेडिकल जांच में वह गर्भवती पाई गई। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।

POCSO कानून क्या कहता है

नाबालिग बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO एक्ट) के तहत किसी भी संस्था में यदि इस तरह की घटना की जानकारी मिलती है, तो संस्था प्रमुख के लिए तत्काल पुलिस और जिला बाल संरक्षण अधिकारी को सूचित करना अनिवार्य है।

POCSO एक्ट की धारा 19 के अनुसार ऐसी घटनाओं की जानकारी छिपाना या पुलिस को सूचना नहीं देना कानूनन अपराध माना जाता है।

व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल

बीजापुर में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में संचालित आवासीय छात्रावासों में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती और कार्रवाई होती, तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।

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