छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की दवा आपूर्ति पर बड़ा सवाल: मरीजों को दी जा रही नकली और अमानक दवाएं!
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की दवा आपूर्ति पर बड़ा सवाल: मरीजों को दी जा रही नकली और अमानक दवाएं!
रायपुर | 31 जुलाई 2025 छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए दी जा रही दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) द्वारा खरीदी गई दवाओं और सर्जिकल सामग्री में नकली और निम्न गुणवत्ता की वस्तुएं मिलने का सिलसिला जारी है।
30 जुलाई की शाम को जारी एक सर्कुलर में मेडिकल कॉलेज रायपुर, डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO), सिविल सर्जन, खंड चिकित्सा अधिकारी, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निम्नलिखित सामग्रियों के उपयोग और वितरण पर तत्काल रोक लगाई जाए:
प्रतिबंधित दवाएं और सामग्री:
1. सर्जिकल ग्लव्स – तीन विभिन्न आकारों में (07, 7.5, 6) – निर्माता: ANO DITA Health Care
2. आईएसआई मार्क युक्त सर्जिकल ग्लव्स (7.5 नंबर) – सन मार्ट पैकेजिंग
3. डेक्सट्रोज विद सोडियम क्लोराइड इंजेक्शन – हसीब फार्मास्यूटिकल
4. एंटीबायोटिक 'शिफा ट्राई एक्सन इंजेक्शन पाउडर (1 ग्राम)' – संदिग्ध बैच नंबर के साथ
इस पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इन बैचों का स्टॉक अस्पतालों में उपलब्ध हो, तो उसका उपयोग पूरी तरह से रोक दिया जाए। लेकिन पत्र की भाषा और समय से यह आशंका जताई जा रही है कि यह निर्देश संभवतः जानबूझकर देर से जारी किया गया, ताकि इन दवाओं का अधिकांश हिस्सा मरीजों पर उपयोग हो चुका हो।
गंभीर जोखिमों की आशंका
इन दवाओं और सामग्रियों का प्रयोग मुख्यतः ऑपरेशन थिएटरों में और पोस्ट-ऑपरेटिव एंटीबायोटिक थैरेपी के रूप में होता है। इससे मरीजों के जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न होने की आशंका है। इन दवाओं की प्रयोगशाला में जांच के बाद निम्न गुणवत्ता की पुष्टि की संभावना जताई गई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है, और अब यह मामला एक बार फिर उसकी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी चिंताजनक
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अब तक लगातार सरकारी अस्पतालों में मिल रही नकली और अमानक दवाइयों की जिम्मेदारी लेने से इनकार करते रहे हैं, जो एक गंभीर और आत्ममंथन योग्य विषय बन गया है।
यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या ठोस कार्रवाई करती है, या फिर यह एक और फाइलों में दफन मामला बनकर रह जाएगा।
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