छत्तीसगढ़ सड़क दुर्घटना में घायलों को 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज योजना के क्रियान्वयन को लेकर एएचपीआई ने मांगा स्पष्ट दिशा-निर्देश
छत्तीसगढ़ सड़क दुर्घटना में घायलों को 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज योजना के क्रियान्वयन को लेकर एएचपीआई ने मांगा स्पष्ट दिशा-निर्देश
रायपुर | 21 मई 2025 छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों के लिए घोषित 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज योजना को लागू करने को लेकर चिकित्सा जगत से दिशा-निर्देश की मांग तेज हो गई है। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI), छत्तीसगढ़ चैप्टर ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य विभाग से मार्गदर्शन और स्पष्ट प्रक्रिया जारी करने का आग्रह किया है।
स्वास्थ्य सचिव को भेजा गया पत्र
एएचपीआई के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया (आईएएस) को पत्र लिखकर इस योजना के तहत इलाज प्रदान करने वाली मान्यता प्राप्त अस्पतालों की सूची शीघ्र जारी करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटना के “गोल्डन आवर” में इलाज सुनिश्चित करने के लिए एम्बुलेंस सेवा, पुलिस सहयोग और मेडिको-लीगल प्रक्रियाओं की स्पष्टता भी जरूरी है।
वायरल पत्र के आधार पर बनी चिंता
19 मई 2025 को सोशल मीडिया में वायरल हुए विभागीय पत्र में, अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) द्वारा सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को यह निर्देश भेजा गया था कि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को दुर्घटना के 7 दिनों के भीतर किसी भी नामित अस्पताल में 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. गुप्ता ने इस निर्णय को “घायलों के लिए जीवन रक्षक और सराहनीय” बताया, लेकिन यह भी कहा कि बिना अस्पतालों के स्पष्ट चिन्हांकन के, आपात स्थिति में मरीजों को उचित उपचार मिलने में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
स्पष्ट प्रोटोकॉल की आवश्यकता
पत्र में यह भी मांग की गई है कि स्वास्थ्य विभाग एक विस्तृत प्रोटोकॉल जारी करे, जो न केवल अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित करे, बल्कि इस बात को भी स्पष्ट करे कि यदि इलाज की लागत निर्धारित सीमा (1.5 लाख रुपये) से अधिक हो जाती है, तो उस स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
जनहित में प्रचार की मांग
डॉ. गुप्ता ने आग्रह किया है कि एक बार विस्तृत दिशानिर्देश और प्रक्रिया तय हो जाए, तब इस योजना की जानकारी जनहित में समाचार पत्रों और डिजिटल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित की जाए, ताकि आम नागरिकों को समय पर और नि:शुल्क इलाज मिल सके।
उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि
इस पत्र की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन (आईएएस) और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम (आईपीएस) को भी भेजी गई है, जिससे इस योजना को बहु-स्तरीय समन्वय के साथ लागू किया जा सके।
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