छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दौड़ेंगी 240 ई-बसें, हरियाली की ओर बढ़ा राज्य का कदम"

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छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दौड़ेंगी 240 ई-बसें, हरियाली की ओर बढ़ा राज्य का कदम"

रायपुर, 22 अप्रैल 2025राज्य शासन ने शहरी परिवहन को प्रदूषणमुक्त और आधुनिक बनाने के दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा की सड़कों पर जल्द ही कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। इन ई-बसों के संचालन को सुचारू और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के विशेषज्ञों ने नगरीय प्रशासन एवं सुडा (SUDA) के अधिकारियों को तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया। प्रशिक्षण का आयोजन नया रायपुर स्थित विश्राम भवन में किया गया। उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने ई-बस सेवा को समयबद्ध और प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए।

बसों का शहरवार बंटवारा इस प्रकार है:

रायपुर: 100 बसें

दुर्ग-भिलाई: 50 बसें

बिलासपुर: 50 बसें

कोरबा: 40 बसें

इन शहरों में बस डिपो, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और चार्जिंग पॉइंट्स (बीटीएम पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण के लिए कुल 67.40 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। रायपुर को 27.23 करोड़, दुर्ग-भिलाई को 17.75 करोड़, बिलासपुर को 11.45 करोड़ और कोरबा को 10.97 करोड़ रुपए मिले हैं।

प्रशिक्षण सत्र में शहरी परिवहन संस्थान के श्री राम पौनीकर ने पर्यावरण संरक्षण में ई-बसों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का बड़ा कारण है और ई-बसें इस चुनौती से निपटने में कारगर साबित होंगी।

डब्ल्यूआरआई इंडिया के चिंतन दफ्तरदार ने ई-बस सेवाओं के संस्थागत ढांचे, निविदा प्रक्रिया और अनुबंध प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी सेवा की गुणवत्ता का आकलन उसके प्रभावी मूल्यांकन और निगरानी से संभव होता है। इसी कड़ी में ई-बस सेवा की निगरानी व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

सीईएसएल के विशेषज्ञों ने ऑपरेटर भुगतान प्रणाली, बिलिंग प्रक्रिया और पीएसएम प्रक्रिया से संबंधित तकनीकी बिंदुओं को भी स्पष्ट किया।

कार्यक्रम में SUDA, नगरीय प्रशासन विभाग, नगर निगमों और तकनीकी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी एवं अभियंता शामिल हुए। इस कार्यशाला ने छत्तीसगढ़ में हरित और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक मजबूत आधारशिला रखी है।

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