गडकरी का दम: 10 साल में बनाई सड़कों की नई दुनिया, हर मोड़ पर दिखा विकास
अगर आज देश की सड़कें चौड़ी, तेज और सुरक्षित नजर आती हैं, तो इसके पीछे एक नाम है – नितिन गडकरी। बीते 10 सालों में उन्होंने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को ऐसा बदला कि गांव से शहर तक की दूरी सिमट गई। गडकरी को अब लोग सिर्फ नेता नहीं, ‘सड़क क्रांति का शिल्पकार’ मानते हैं।
रफ्तार से हुआ विकास का उदय
2014 में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद गडकरी ने हर साल औसतन 37 किलोमीटर हाईवे प्रतिदिन बनवाए।
2024 तक 1.6 लाख किमी से ज्यादा सड़कों का निर्माण या विस्तार हुआ।
32 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, जिनमें से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट ने देश की तस्वीर बदली।
गांव से जुड़े शहर, और देश से जुड़ी दुनिया
भारत की सड़कें अब सिर्फ सफर नहीं, विकास की धड़कन बन चुकी हैं।
4 लेन से 8 लेन तक के रास्तों ने औद्योगिक क्षेत्रों को पोर्ट्स से जोड़ा।
47 लाख टन सीमेंट की बचत और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण तकनीक अपनाई गई।
गडकरी क्यों हैं खास?
डेडलाइन से पहले काम पूरा करना
रोज़गार सृजन के साथ-साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग
हर राज्य में समान गति से विकास पर ज़ोर
आंकड़े जो गडकरी की सफलता की गवाही देते हैं
कुल निवेश: 1.45 लाख करोड़ से अधिक
59% प्रोजेक्ट समय से पहले पूरे
100 से ज्यादा टनल्स और पुलों का निर्माण
2030 तक हर जिले को नेशनल हाईवे से जोड़ने का लक्ष्य
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