मरवाही में भालू का हमला: जंगल गईं दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल"
मरवाही (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के मरवाही वन क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब जंगल में महुआ बीनने गईं दो महिलाओं पर जंगली भालू ने अचानक हमला कर दिया। यह घटना मरवाही तहसील के गुल्लीडांड गांव की है, जहां सुबह-सुबह ग्रामीण महिलाएं रोज की तरह जंगल में महुआ चुनने गई थीं।
घटना में घायल महिलाओं की पहचान परमिला यादव और सुमित्रा रैदास के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही दोनों महिलाएं जंगल के भीतर पहुँचीं, एक भालू झाड़ियों से निकलकर उन पर टूट पड़ा। भालू ने पहले सुमित्रा पर हमला किया, जिसे बचाने की कोशिश में परमिला भी गंभीर रूप से घायल हो गई। दोनों महिलाएं बुरी तरह लहूलुहान हो गईं और मदद के लिए चिल्लाने लगीं।
महिलाओं की चीख-पुकार सुनकर नजदीकी खेतों में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए भालू को भगाया और दोनों महिलाओं को किसी तरह जंगल से बाहर निकाला। इसके तुरंत बाद आपातकालीन सेवा को सूचित किया गया, और डायल 108 तथा 112 की एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद मरवाही अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने एक महिला की हालत को गंभीर बताया है।
वन क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे हमले
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब भालू गांव की सीमा तक आ पहुंचा हो। इससे पहले भी दानीकुंडी और खंता गांव के पास जंगलों में भालू देखे जा चुके हैं। हालांकि, पहले किसी बड़े हादसे की खबर नहीं आई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि वन क्षेत्र में लगातार हो रही अवैध कटाई, मिट्टी-मुरुम और रेत का अवैध खनन जंगली जानवरों को परेशान कर रहा है, जिससे वे अब मानव बस्तियों की ओर आने लगे हैं।
वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों में भय और रोष का माहौल है। उनका कहना है कि वन विभाग को इस विषय में पहले ही आगाह किया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब जब महिलाओं की जान पर बन आई है, तब प्रशासन हरकत में आया है।
वन विभाग ने अब जंगल में गश्त बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की बात कही है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल न जाएं और किसी भी जंगली जानवर की गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने की कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि घायल महिलाओं का मुफ्त इलाज कराया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएं।
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