पद्मश्री से नवाजे गए पंडी राम मंडावी: बस्तर की लोक-संस्कृति के अनमोल सिपाही, मुरिया कला को दिलाया राष्ट्रीय सम्मान
बस्तर की माटी से जुड़े गोंड मुरिया जनजाति के वरिष्ठ लोक कलाकार पंडी राम मंडावी को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें बस्तर की पारंपरिक लोक-संस्कृति और विरासत को जीवित रखने एवं उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए मिला है।
मंडावी दशकों से मुरिया जनजाति की लोक कलाओं—नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प—का संरक्षण कर रहे हैं। उन्होंने न केवल बस्तर की संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाई, बल्कि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक अस्मिता को सहेजने में अहम भूमिका निभाई है।
संस्कृति को मंच दिलाने वाले कलाकार
पंडी राम मंडावी ने आदिवासी जीवनशैली से जुड़े अनेक पारंपरिक नृत्य-नाट्य रूपों को बचाया और उन्हें मंच तक पहुँचाया। खासकर घोटुल संस्कृति, देव नृत्य और मुरिया उत्सवों में प्रयोग होने वाली पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों की जानकारी को लुप्त होने से बचाया।
सरकार से लेकर समाज तक सराहना
पद्मश्री की घोषणा के बाद मंडावी को न केवल स्थानीय जनता, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार से भी सराहना मिली। मुख्यमंत्री समेत कई जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी और उनके योगदान को बस्तर के गौरव के रूप में सराहा।
"ये सम्मान बस्तर के हर कलाकार का है"
सम्मान मिलने के बाद पंडी राम मंडावी ने कहा, "मैंने कभी पुरस्कार की इच्छा से काम नहीं किया। यह पद्मश्री बस्तर की माटी, यहां की परंपरा और हर उस कलाकार का सम्मान है, जो अपने संस्कारों को जिंदा रखने के लिए संघर्ष करता है।"
बस्तर से भारत के मंच तक
मंडावी ने भारत सरकार के सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेकर मुरिया संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। उनके प्रयासों से आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिली है।
संघर्ष से सम्मान तक की कहानी
गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका सफर आज पद्मश्री जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान तक पहुँचा है। उनकी यह यात्रा एक प्रेरणा है उन सभी के लिए, जो अपने क्षेत्र की लोकसंस्कृति को पहचान दिलाना चाहते हैं।
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