गोलियों की गूंज से निकलकर विकास की राह पर चलीं 5 महिला नक्सली"
नारायणपुर, छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से एक नई सुबह की दस्तक सुनाई दी है। नारायणपुर जिले में पांच महिला नक्सलियों ने हिंसा और हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का ऐलान किया है। बरसों से लाल आतंक की छाया में जी रहीं इन महिलाओं ने अब बंदूक की जगह शांति और सम्मान की ज़िंदगी को चुना है।
कौन हैं ये महिलाएं?
आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सलियों में लक्ष्मी वंजामी (19), सन्नी उर्फ जमली पोड़ियाम (30), कुम्मे पोड़ियाम (19), सुकाय पोड़ियाम (20) और अनिता उसेंडी (23) शामिल हैं। सभी महिलाएं माड़ डिवीजन के कुतुल, नेलनार और परलकोट एरिया कमेटी से जुड़ी थीं। इन पर एक-एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित था।
इनमें से कई बेहद कम उम्र में नक्सल मूवमेंट में शामिल हो गई थीं। कुछ तो ऐसी थीं, जिन्होंने बचपन में ही बंदूक थाम ली थी, लेकिन अब उन्होंने उस जीवन से तौबा कर ली है।
कैसे हुआ आत्मसमर्पण?
नारायणपुर पुलिस और CRPF की संयुक्त रणनीति, लगातार जनजागृति अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति ने असर दिखाया। आत्मसमर्पण के वक्त इन महिलाओं ने कहा, “हमें अब विकास चाहिए, न कि विनाश। हमने जो देखा, वह सिर्फ दर्द और डर था। अब हम समाज की सेवा करना चाहते हैं।”
प्रत्येक महिला को राज्य सरकार की नीति के तहत 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक सौंपा गया। इसके साथ ही उन्हें सुरक्षित पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी दिए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक का बयान:
SP प्रभात कुमार ने बताया, “यह सिर्फ पांच नक्सलियों का आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि एक बड़ा संदेश है— कि अब जंगल में डर नहीं, बदलाव की बयार चल रही है। 2025 में अब तक 87 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह सरकार की मानवतावादी नीति का असर है।”
जनता की राय:
स्थानीय ग्रामीणों ने इस आत्मसमर्पण का स्वागत किया है। ग्राम प्रमुख ने कहा, “हमने कई सालों तक अपने ही बच्चों को हथियार उठाते देखा। अब जब वे लौट रहे हैं, तो हमें उन्हें अपनाना होगा और एक नई शुरुआत देनी होगी।”
पुनर्वास की राह:
सरकार का लक्ष्य है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को न सिर्फ सामान्य जीवन मिले, बल्कि वे समाज के लिए मिसाल बनें। इसके तहत उन्हें स्किल डेवलपमेंट, स्वरोजगार और शिक्षा के अवसर दिए जाएंगे।
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