ठेकेदार से बचते मजदूर मालगाड़ी से कटे
झारखंड से आए 12 मजदूरों का सपना था कि वे बिहार के औरंगाबाद में मजदूरी कर अपने परिवारों का सहारा बनेंगे। लेकिन उनका यह सपना एक भयानक हादसे में टूट गया। मजदूरों का आरोप है कि जिस ठेकेदार ने उन्हें बुलाया, उसने न केवल उनका शोषण किया बल्कि जब मजदूरी मांगी तो उन्हें पीटा गया।
इस मारपीट से घबराकर कुछ मजदूर रात के अंधेरे में भागने लगे। इसी दौरान रेल पटरी पार करते वक्त 5 मजदूर मालगाड़ी की चपेट में आ गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। जो मजदूर बच पाए, उन्होंने अपने दोस्तों के शव टुकड़ों में समेटे। एक मजदूर ने रोते हुए बताया कि "हम हड्डी तोड़ मेहनत करने आए थे, अब दोस्तों की लाशें बोरियों में भरकर लेकर जा रहे हैं।"
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही भी इस घटना में सवालों के घेरे में है। मृतकों की पहचान झारखंड के चतरा और पलामू जिलों से हुई है। परिजन सदमे में हैं और सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं। वहीं, ठेकेदार की गिरफ्तारी की मांग भी तेज हो गई है।
यह हादसा न सिर्फ मजदूरी की असुरक्षित व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आज भी मजदूरों की जिंदगी कितनी सस्ती समझी जाती है। काम की तलाश में घर से निकले लोग अब अर्थियों में लौट रहे हैं — यह हमारे समाज की एक बेहद दर्दनाक सच्चाई है।
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