कांकेर के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम 5 जून को नागपुर में आरएसएस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे
कांकेर के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम 5 जून को नागपुर में आरएसएस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे
बस्तर केधर्मांतरण,जल-जंगल-जमीन और नक्सल के बाद की नीति पर हो सकती है अहम चर्चा
कांकेर/रायपुर/नागपुर –बस्तर और कांकेर के अनुभवी नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी सांसद रहे अरविंद नेताम 5 जून को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह आयोजन संघ मुख्यालय में हो रहा है और माना जा रहा है कि नेताम की संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से एकांत में विशेष मुलाक़ात भी तय है।
क्या हो सकते हैं मुख्य चर्चा के विषय?
अरविंद नेताम ने स्पष्ट किया है कि वह बस्तर संभाग के वर्तमान और भविष्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को इस चर्चा में उठाएंगे। संभावित चर्चा बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. बस्तर में तेजी से फैलता धर्मांतरण – यह अब एक गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है। नेताम का मानना है कि धर्मांतरण का समाधान केवल "घर वापसी" जैसे प्रतीकों से नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे की मूलभूत समस्याओं को समझकर नीति बनानी होगी।
2. जल, जंगल, जमीन का अधिकार – आदिवासियों की परंपरागत संपत्ति और अधिकारों की रक्षा पर फोकस रहेगा।
3. नक्सल समस्या के बाद की रणनीति – बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है, लेकिन नेताम का मानना है कि "विचारधारा अब भी जीवित है"। इसकी निगरानी और दूरगामी नीति जरूरी है।
4. कॉर्पोरेट की एंट्री के प्रभाव – नक्सल के बाद यदि कॉर्पोरेट सेक्टर बस्तर में प्रवेश करता है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इससे स्थानीय आदिवासी हितों को नुकसान न हो।
5. राज्य और केंद्र सरकार की मास्टर प्लानिंग – नेताम जानना चाहते हैं कि सरकारें बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए क्या योजना लेकर आ रही हैं।
आदिवासी समाज पर केन्द्रित रहेगा नेताम का फोकस
अरविंद नेताम ने स्पष्ट किया है कि उनकी पूरी प्राथमिकता बस्तर और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास पर होगी। उनका कहना है कि वे किसी पार्टी या विचारधारा की बजाय केवल आदिवासियों के भले के लिए काम कर रहे हैं।
धर्मांतरण: एक उभरता संकट
बस्तर में धर्मांतरण को लेकर माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा है। नेताम और कई अन्य सामाजिक नेता इसे एक खतरे के निशान को पार करती समस्या मान रहे हैं। कथित संत धीरेन्द्र शास्त्री भी हाल ही में बयान दे चुके हैं कि "पदयात्रा और प्रवचन" से यह समस्या नहीं सुलझेगी, जब तक धर्मांतरण के पीछे की समस्याओं का हल नहीं निकाला जाता।
संघ और उसके अनुसांगिक संगठनों की भूमिका
इस कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वनवासी कल्याण आश्रम और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों को बस्तर संभाग में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत मिल सकते हैं। नेताम ने चेताया है कि यदि समय रहते रणनीति नहीं बनी, तो बस्तर से उठी समस्या पूर्वोत्तर तक पहुँच सकती है।
मायने
5 जून को नागपुर में होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक उपस्थिति नहीं होगी, बल्कि बस्तर और देश की आदिवासी नीति पर एक नई दिशा तय कर सकता है। अरविंद नेताम जैसे अनुभवी नेता की भागीदारी और उनके प्रस्तावित मुद्दे इस चर्चा को और भी महत्वपूर्ण बना देते हैं।
What's Your Reaction?
Like
1
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0