निज सचिवों और सहायकों के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा में ऐतिहासिक प्रशिक्षण शिविर, लोकतंत्र को मजबूती देने की पहल
छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को मंत्रियों और विधायकों के निज सचिवों (PS) और निज सहायकों (PA) के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह आयोजन न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास रहा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का प्रयास भी रहा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा, "एक जनप्रतिनिधि की सफलता में उनके निज सहायकों और सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे मंच के पीछे रहकर ऐसे काम करते हैं, जो नेताओं की छवि और कार्यक्षमता को नई ऊंचाई देते हैं।"
डॉ. सिंह ने कहा कि IIM रायपुर में पहले जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया और अब उनके सबसे करीबी सहयोगियों को प्रशिक्षित करना एक क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की सेवा में लगे केवल सौ से अधिक PA/PS को यदि सही दिशा में प्रशिक्षित किया जाए, तो शासन की योजनाएं धरातल तक अधिक प्रभावी रूप से पहुंच सकती हैं।”
विधानसभा अध्यक्ष ने साफ कहा कि "अगर आपका परफॉर्मेंस अच्छा होगा, तो मंत्री या विधायक की सफलता सुनिश्चित होगी। मैंने खुद ऐसे उदाहरण देखे हैं, जहां एक मजबूत PA या PS के कारण जनप्रतिनिधि बार-बार चुनाव जीतते रहे।"
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेताओं ने रखे विचार
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी अपने संबोधन में कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने एक तीखा लेकिन यथार्थपरक बयान देते हुए कहा, “अगर किसी नेता को बर्बाद करना हो तो उनका PA या PS ही कर सकता है, और अगर उन्हें सफल बनाना हो, तो भी वही कर सकता है।”
डॉ. महंत ने बताया कि वर्तमान विधानसभा में 51 नए विधायक चुनकर आए हैं, और ऐसे में उनके सहायक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल कागजी काम करना ही सहायक का काम नहीं है, बल्कि जनसेवा और जनप्रतिनिधि की छवि को बेहतर बनाना उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने PA/PS की सजगता और संवेदनशीलता को लोकतांत्रिक कार्यों की गुणवत्ता से जोड़ा और कहा कि, "आपके कार्य और व्यवहार ही आपके विधायक या मंत्री के व्यवहार की झलक होते हैं।"
अनुभव और तकनीक का समावेश
विधानसभा अध्यक्ष के विशेष सचिव अरुण बिसेन ने अपने 23 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए PA/PS को सोशल मीडिया, टेक्नोलॉजी और जनसंपर्क के माध्यम से जनप्रतिनिधियों की छवि निर्माण के तौर-तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल टूल्स जैसे क्लाउड स्टोरेज, गूगल ड्राइव और वर्चुअल डॉक्यूमेंट्स के उपयोग पर भी जोर दिया।
बिसेन ने अपने अनुभव से प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने 2011 में एक गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति का लिवर ट्रांसप्लांट दो राज्यों के समन्वय से सफल कराया। उन्होंने कहा कि "हर PA/PS को जनहित के मामलों में व्यक्तिगत संवेदनशीलता रखनी चाहिए, तभी वे एक मजबूत कड़ी बन सकते हैं।"
व्यवस्थात्मक जानकारी से लेकर संसदीय प्रक्रिया तक
शिविर में विधानसभा सचिवालय के विभिन्न अधिकारियों ने क्रमश: विधान सभा की कार्यप्रणाली, प्रश्नकाल, स्थगन प्रस्ताव, बजट प्रक्रिया, विधेयक निर्माण, समिति कार्य, सदस्य सुविधा, वित्तीय अधिकार और सुरक्षा प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।
अनुसंधान अधिकारी डॉ. बलराम शुक्ला और वरिष्ठ सूचना अधिकारी जी.एस. सलूजा ने विधायी प्रक्रिया, बजट, अनुदान मांगें, विधेयक पारण और जनप्रतिनिधियों के लिए शोध व संचार माध्यमों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
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